Course Content
Challenges of nation Building
0/3
Era of one-party dominance
0/3
Politics of Planned Development
0/3
India’s External Relations
0/3
Challenges to and restoration of the Congress system
0/3
The crisis of Democratic Order
Regional aspirations
Recent Developments in indian politics
Class 12 Political Science – Politics in India since Independence

स्वतंत्रता के बाद भारत के सामने राष्ट्र-निर्माण के साथ-साथ लोकतांत्रिक राजनीति स्थापित करने की चुनौती भी थी।
अनेक नए स्वतंत्र देशों ने तानाशाही अपनाई, परन्तु भारत ने सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार पर आधारित लोकतांत्रिक चुनाव कराए।
पहला आम चुनाव (1951–52) 17 करोड़ मतदाताओं के साथ हुआ। अधिकांश गरीब व अशिक्षित होने के बावजूद यह सफल रहा और विश्व को सिद्ध कर दिया कि लोकतंत्र हर परिस्थिति में संभव है।

कांग्रेस पार्टी ने पहले तीन आम चुनावों (1952, 1957, 1962) में तीन-चौथाई लोकसभा सीटें जीत लीं, जबकि उसके मत 50% से भी कम थे।
कांग्रेस की सफलता का आधार था—स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत, नेहरू का नेतृत्व, व्यापक संगठन और एक सामाजिक व वैचारिक गठबंधन जिसमें किसान, मजदूर, उद्योगपति, ग्रामीण-शहरी, विभिन्न जातियाँ और धर्म सम्मिलित थे।

विपक्षी दल भी सामने आए—
• भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI): 1957 में केरल में सरकार बनाई, पर 1959 में अनुच्छेद 356 के तहत बर्खास्त।
• समाजवादी दल: विभाजित, कांग्रेस की पूँजीपतियों-समर्थक नीतियों की आलोचना।
• भारतीय जनसंघ (BJS): 1951 में स्थापित, आरएसएस से जुड़ा, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और परमाणु शक्ति का समर्थन।

यद्यपि विपक्ष की ताकत सीमित थी, उसने लोकतंत्र को जीवित रखा और भविष्य के नेताओं को तैयार किया।

कांग्रेस पार्टी के भीतर कई गुटबाज़ी थी, जिससे वह स्वयं सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों का काम करती थी।
इसी कारण इस दौर को “कांग्रेस प्रणाली” कहा गया, पर यह प्रभुत्व लोकतांत्रिक ढंग से आया, न कि चीन या क्यूबा जैसे एक-दलीय शासन की तरह।

बिंदु:
• 1951–52: पहला आम चुनाव – विश्व लोकतंत्र का ऐतिहासिक क्षण।
• कांग्रेस प्रभुत्व (364/489 सीटें – 1952 लोकसभा)。
• 1957 – केरल में CPI की ऐतिहासिक विजय।
• 1959 – अनुच्छेद 356 के अंतर्गत केरल सरकार की बर्खास्तगी।
• “कांग्रेस प्रणाली” – समावेशी, गठबंधन-जैसी, गुटबाज़ी सहनशील।