1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
प्राचीन संबंध: सांस्कृतिक, धार्मिक और व्यापारिक आदान-प्रदान (बौद्ध धर्म, रेशम मार्ग)।
स्वतंत्रता के बाद: भारत ने 1949 में जनवादी गणराज्य चीन को मान्यता दी।
पंचशील समझौता (1954): संप्रभुता का सम्मान, आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना, शांतिपूर्ण सहअस्तित्व।
2. प्रमुख विवाद
सीमा विवाद: अक्साई चिन (लद्दाख) चीन के कब्जे में; अरुणाचल प्रदेश को चीन ‘दक्षिण तिब्बत’ कहता है।
1962 का युद्ध: चीन ने भारत पर आक्रमण किया और अक्साई चिन पर कब्जा किया।
डोकलाम गतिरोध (2017): भारत ने चीन की सड़क निर्माण गतिविधि का विरोध किया।
गलवान घाटी संघर्ष (2020): 45 वर्षों बाद पहली बार सैनिक हताहत हुए।
सीमा पर ढाँचागत प्रतिस्पर्धा जारी।
3. सहयोग एवं समझौते
व्यापार: चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, हालाँकि व्यापार घाटा अधिक है।
बहुपक्षीय मंच: BRICS, SCO, RIC में सहयोग।
वुहान शिखर सम्मेलन (2018), चेन्नई शिखर सम्मेलन (2019): अनौपचारिक कूटनीति।
सांस्कृतिक संबंध: बौद्ध धर्म, योग, छात्र आदान-प्रदान।
4. वर्तमान स्थिति (2017–2024)
डोकलाम (2017) और गलवान (2020) के बाद संबंध बिगड़े।
भारत ने कई चीनी ऐप पर प्रतिबंध लगाया और निवेश पर रोक लगाई।
सीमा से जुड़े वार्तालाप जारी हैं लेकिन अविश्वास गहरा है।
व्यापार जारी है परन्तु चीन के पक्ष में भारी घाटा है।
5. चुनौतियाँ
अनसुलझे सीमा विवाद।
चीन–पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) PoK से होकर।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक प्रतिद्वंद्विता।
नेपाल, श्रीलंका, मालदीव में चीन का प्रभाव।
आर्थिक असंतुलन – भारत का चीन पर आयात निर्भरता।
6. आगे की राह
सीमा रक्षा और ढाँचागत विकास को मजबूत करना।
व्यापार में विविधता लाना और चीन पर निर्भरता घटाना।
BRICS, SCO जैसे मंचों पर संवाद बढ़ाना।
हिंद-प्रशांत में गठबंधन (QUAD) को सशक्त करना।
संवाद बनाए रखना लेकिन राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना।