विदेश नीति की पृष्ठभूमि
स्वतंत्रता के बाद भारत की प्राथमिकताएँ थीं संप्रभुता की रक्षा, शीत युद्ध गुटों से दूरी और आर्थिक विकास। जवाहरलाल नेहरू ने केंद्रीय भूमिका निभाई।
विदेश नीति के सिद्धांत
गुटनिरपेक्षता: अमेरिका या सोवियत गुट से न जुड़ना। पंचशील (1954) चीन के साथ: पारस्परिक सम्मान, आक्रमण न करना, समानता, हस्तक्षेप न करना, शांतिपूर्ण सहअस्तित्व। औपनिवेशिक-विरोध: एशिया-अफ्रीका की स्वतंत्रता का समर्थन।
शीत युद्ध और भारत
भारत ने गुटनिरपेक्ष नीति अपनाई, पर रक्षा/उद्योग हेतु सोवियत संघ पर भरोसा किया। अमेरिका से संबंध मिश्रित रहे—कृषि सहयोग मिला, पर कश्मीर और परमाणु नीति पर मतभेद। भारत ने 1961 में गुटनिरपेक्ष आंदोलन की स्थापना की।
पड़ोसी देशों से संबंध
पाकिस्तान: कश्मीर विवाद और 1947–48 का युद्ध। चीन: पंचशील मित्रता, पर 1962 भारत-चीन युद्ध। श्रीलंका, नेपाल, भूटान, म्यांमार: संबंध संस्कृति, जातीयता और सुरक्षा से प्रभावित।
भारत और संयुक्त राष्ट्र
UN शांति-रक्षा अभियानों में सक्रिय। निःशस्त्रीकरण और न्यायपूर्ण व्यवस्था की वकालत। नव स्वतंत्र देशों के प्रतिनिधित्व की मांग।
उपलब्धियाँ व चुनौतियाँ
उपलब्धियाँ: स्वतंत्र नीति, NAM नेतृत्व, शांति समर्थन, विकासशील देशों की आवाज़। चुनौतियाँ: चीन-पाक सीमा विवाद, विदेशी सहायता पर निर्भरता, सुरक्षा–विकास संतुलन।