प्रश्न 1. यूरोपीय संघ (EU) के विकास की रूपरेखा प्रस्तुत कीजिए और इसे समकालीन शक्ति केन्द्र के रूप में समझाइए।
प्रस्तावना:
यूरोपीय संघ द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूरोप के पुनर्निर्माण और स्थायी शांति के लिए एक प्रयोग के रूप में उभरा।
मुख्य भाग:
1. ऐतिहासिक आधार – मार्शल प्लान, OEEC, यूरोप की परिषद, EEC।
2. मास्ट्रिख्ट संधि (1992) – यूरोपीय संघ की स्थापना, यूरो मुद्रा और साझा नीतियाँ।
3. आर्थिक शक्ति – विश्व का सबसे बड़ा व्यापारिक गुट, यूरो डॉलर का विकल्प।
4. राजनीतिक प्रभाव – संयुक्त राष्ट्र, WTO, जलवायु वार्ता।
5. सैन्य आयाम – संयुक्त रक्षा व्यय, फ्रांस के परमाणु हथियार।
6. चुनौतियाँ – ब्रेक्सिट, आंतरिक मतभेद।
निष्कर्ष:
EU क्षेत्रीय एकीकरण का सफल उदाहरण है, परन्तु आंतरिक समस्याएँ इसकी शक्ति को सीमित करती हैं।
प्रश्न 2. आसियान (ASEAN) के उद्देश्यों और वैश्विक राजनीति में इसके महत्व की चर्चा कीजिए।
प्रस्तावना:
आसियान 1967 में शांति, सहयोग और विकास के उद्देश्य से स्थापित किया गया।
मुख्य भाग:
1. बैंकॉक घोषणा (1967) – संस्थापक देश और उद्देश्य।
2. आसियान पद्धति – सहमति, अनौपचारिकता, संप्रभुता का सम्मान।
3. आर्थिक भूमिका – भारत, चीन, अमेरिका के साथ एफटीए, आसियान आर्थिक समुदाय।
4. सुरक्षा भूमिका – आसियान क्षेत्रीय मंच (1994), संघर्ष समाधान।
5. विज़न 2020 – समेकित और बाहरी दुनिया की ओर उन्मुख आसियान।
निष्कर्ष:
आसियान दर्शाता है कि छोटे देश सामूहिक शक्ति से स्थिरता और पहचान हासिल कर सकते हैं।
प्रश्न 3. चीन के आर्थिक उदय और इसके वैश्विक राजनीति पर प्रभाव का विश्लेषण कीजिए।
प्रस्तावना:
1978 में देंग शियाओपिंग के सुधारों ने चीन को एक वैश्विक आर्थिक शक्ति बना दिया।
मुख्य भाग:
1. सुधार – खुला द्वार नीति, SEZ, निजीकरण, WTO सदस्यता।
2. विकास – उच्च GDP, FDI का प्रमुख गंतव्य, विशाल विदेशी मुद्रा भंडार।
3. चुनौतियाँ – असमानता, बेरोजगारी, पर्यावरण प्रदूषण, भ्रष्टाचार।
4. क्षेत्रीय भूमिका – एशिया की वृद्धि का इंजन, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में निवेश।
5. वैश्विक प्रभाव – अमेरिका की चुनौती, बहुध्रुवीयता का समर्थन।
निष्कर्ष:
चीन का उदय वैश्विक राजनीति को बदल रहा है, जिसमें अवसर और चुनौतियाँ दोनों निहित हैं।
प्रश्न 4. 1962 के युद्ध के बाद भारत-चीन संबंधों की प्रकृति की व्याख्या कीजिए।
प्रस्तावना:
1962 का युद्ध भारत-चीन संबंधों में अविश्वास का कारण बना, परंतु धीरे-धीरे सुधार भी हुआ।
मुख्य भाग:
1. 1962 के बाद संबंध ठप, 1976 में पुनः राजनयिक संबंध।
2. 1988 में राजीव गांधी की चीन यात्रा – नए युग की शुरुआत।
3. आर्थिक संबंध – 1990 के दशक से व्यापार तेज़ी से बढ़ा।
4. सहयोग – WTO, ऊर्जा क्षेत्र।
5. तनाव – सीमा विवाद, चीन-पाकिस्तान सहयोग, CPEC।
निष्कर्ष:
भारत-चीन संबंध सहयोग और प्रतिस्पर्धा का मिश्रण हैं, जिन्हें संतुलित कूटनीति की आवश्यकता है।
प्रश्न 5. जापान और दक्षिण कोरिया की भूमिकाओं की तुलना कीजिए।
प्रस्तावना:
जापान और दक्षिण कोरिया एशिया के प्रमुख आर्थिक शक्ति केन्द्र हैं।
मुख्य भाग:
1. जापान – विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, तकनीकी महाशक्ति, OECD सदस्य, अमेरिका का सहयोगी।
2. दक्षिण कोरिया – हान नदी का चमत्कार, ग्यारहवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, तकनीकी निर्यातक।
3. समानताएँ – निर्यात आधारित वृद्धि, अमेरिका से गठबंधन।
4. भिन्नताएँ – जापान वैश्विक प्रभावशाली, कोरिया क्षेत्रीय केंद्रित।
निष्कर्ष:
दोनों देश एशिया की आर्थिक शक्ति को बढ़ाते हैं और बहुध्रुवीयता का समर्थन करते हैं।
प्रश्न 6. आसियान ने एशिया में महाशक्तियों के प्रभाव को किस प्रकार संतुलित किया?
प्रस्तावना:
आसियान शीत युद्ध काल से ही एशिया में स्थिरता का कारक रहा।
मुख्य भाग:
1. गुटनिरपेक्षता – अमेरिका, सोवियत, चीन के बीच संतुलन।
2. आसियान क्षेत्रीय मंच – संवाद का मंच।
3. विविधीकरण – विभिन्न शक्तियों से आर्थिक संबंध।
4. संघर्ष समाधान – कंबोडिया, ईस्ट तिमोर।
5. सामूहिक कूटनीति – छोटे देशों की शक्ति।
निष्कर्ष:
आसियान ने संतुलित कूटनीति द्वारा महाशक्तियों के दबाव को संतुलित किया।
प्रश्न 7. यूरोपीय संघ और आसियान के उदाहरणों से क्षेत्रवाद के महत्व का मूल्यांकन कीजिए।
प्रस्तावना:
क्षेत्रवाद आज की विश्व राजनीति की महत्वपूर्ण प्रवृत्ति है।
मुख्य भाग:
1. EU – गहन एकीकरण, साझा संस्थाएँ।
2. आसियान – सहमति आधारित, संप्रभुता का सम्मान।
3. आर्थिक शक्ति – EU वैश्विक व्यापार में, आसियान क्षेत्रीय वृद्धि में।
4. राजनीतिक भूमिका – EU कूटनीति, आसियान मध्यस्थता।
5. चुनौतियाँ – EU के आंतरिक मतभेद, आसियान की सीमाएँ।
निष्कर्ष:
दोनों मॉडल दिखाते हैं कि क्षेत्रवाद शांति और शक्ति का आधार है।
प्रश्न 8. चीन के वैश्विक शक्ति बनने की राह में आने वाली चुनौतियों की व्याख्या कीजिए।
प्रस्तावना:
चीन का उदय उल्लेखनीय है, लेकिन चुनौतियों से घिरा हुआ है।
मुख्य भाग:
1. आर्थिक असमानता – ग्रामीण-शहरी, तटीय-आंतरिक।
2. बेरोजगारी – श्रम अधिशेष और नौकरी की कमी।
3. पर्यावरण – प्रदूषण, जलवायु संकट।
4. शासन – भ्रष्टाचार, राजनीतिक सुधारों का अभाव।
5. बाहरी संदेह – पड़ोसी देशों की चिंता, अमेरिका से प्रतिद्वंद्विता।
निष्कर्ष:
इन आंतरिक और बाहरी चुनौतियों से निपटना चीन की वैश्विक भूमिका के लिए अनिवार्य है।
प्रश्न 9. जापान ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद किस प्रकार आर्थिक शक्ति का विकास किया?
प्रस्तावना:
जापान ने युद्ध के बाद तीव्र आर्थिक पुनर्निर्माण किया।
मुख्य भाग:
1. अमेरिका की मदद और सुधार।
2. उद्योग – तकनीकी विकास और निर्यात।
3. OECD सदस्यता (1964), वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़ाव।
4. नवाचार – इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल।
5. सीमाएँ – अनुच्छेद 9 से सैन्य प्रतिबंध।
निष्कर्ष:
जापान आर्थिक दिग्गज के रूप में उभरा, वैश्विक अर्थव्यवस्था को योगदान दिया।
प्रश्न 10. दक्षिण कोरिया का विकास मॉडल विकासशील देशों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
प्रस्तावना:
दक्षिण कोरिया ने कुछ ही दशकों में गरीबी से समृद्धि की यात्रा तय की।
मुख्य भाग:
1. हान नदी का चमत्कार – तीव्र औद्योगीकरण।
2. निर्यात आधारित वृद्धि – सैमसंग, LG, ह्युंडई।
3. समान नीतियाँ – शिक्षा और सामाजिक कल्याण।
4. OECD सदस्यता (1996), ग्यारहवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था।
5. शिक्षा और शासन – अनुकरणीय उदाहरण।
निष्कर्ष:
दक्षिण कोरिया का मॉडल दिखाता है कि अनुशासन, नवाचार और सुशासन विकास की कुंजी हैं।