भारत–बांग्लादेश संबंध (Hindi)
1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
1971 का मुक्ति संग्राम: भारत ने पाकिस्तान से स्वतंत्रता के लिए बांग्लादेश के संघर्ष में सक्रिय समर्थन दिया। भारत की निर्णायक सैन्य कार्रवाई के बाद दिसंबर 1971 में बांग्लादेश का गठन हुआ। 1972 में भारत–बांग्लादेश मैत्री, सहयोग और शांति संधि पर हस्ताक्षर हुए, जिसने घनिष्ठ राजनयिक संबंधों की नींव रखी।
साझा संस्कृति: भारत और बांग्लादेश में भाषाई, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंध हैं, विशेषकर बंगाली धरोहर के माध्यम से। स्वतंत्रता संग्राम की साझा परंपराएँ और सांस्कृतिक आदान-प्रदान दोनों देशों को राजनीति से परे जोड़ते हैं।
2. प्रमुख विवाद
सीमा प्रबंधन: भारत और बांग्लादेश की सीमा 4,096 किमी लंबी है, जो भारत की सबसे लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है। इससे जुड़े मुद्दों में अवैध प्रवासन, मानव तस्करी, तस्करी और सीमा पर हिंसा शामिल हैं।
जल विवाद: 1996 की गंगा जल संधि ने फरक्का पर जल बँटवारे का समाधान किया, लेकिन तीस्ता नदी का विवाद अभी भी अनसुलझा है, जो दोनों देशों के लिए संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा है।
क्षेत्रीय विवाद: 2015 का भूमि सीमा समझौता (LBA) ने दशकों पुराने छिटमहल विवाद को समाप्त किया और शांतिपूर्ण सीमा निर्धारण किया। 2014 में समुद्री सीमा विवाद का भी अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता से समाधान हुआ, जो बांग्लादेश के पक्ष में गया।
3. सहयोग के क्षेत्र
व्यापार और अर्थव्यवस्था: भारत बांग्लादेश के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है। बांग्लादेश भारत से बिजली आयात करता है और भारतीय निवेश से अवसंरचना लाभान्वित होती है।
संपर्क: कोलकाता–ढाका, कोलकाता–खुलना और अगरतला–ढाका बस और ट्रेन सेवाएँ तथा समुद्री शिपिंग समझौते संपर्क को मजबूत बनाते हैं।
सुरक्षा: दोनों देश आतंकवाद और विद्रोह के खिलाफ सहयोग करते हैं। बांग्लादेश ने भारतीय विद्रोही समूहों पर कार्रवाई की है।
ऊर्जा: भारत बांग्लादेश को बिजली निर्यात करता है और ऊर्जा परियोजनाओं में संयुक्त उपक्रम करता है।
संस्कृति और जन-संपर्क: साझा त्योहार, भाषा और परंपराएँ सांस्कृतिक कूटनीति को मजबूत करती हैं। पर्यटन, शैक्षिक आदान-प्रदान और ऐतिहासिक संबंध द्विपक्षीय सौहार्द को गहरा करते हैं।
4. वर्तमान स्थिति (2015–2024)
2015 का भूमि सीमा समझौता दोनों देशों के बीच विश्वास बढ़ाने और लंबे विवाद को हल करने में महत्वपूर्ण रहा। संपर्क परियोजनाओं ने भारत के पूर्वोत्तर को बांग्लादेश से जोड़ने में मदद की। हालाँकि तीस्ता जल बँटवारे का मुद्दा अब भी लंबित है, जिससे राजनीतिक अड़चनें बनी हुई हैं।
बांग्लादेश में चीनी निवेश, विशेषकर बंदरगाहों और अवसंरचना में, भारत के लिए रणनीतिक चुनौती है। इसके बावजूद, द्विपक्षीय संबंध दक्षिण एशिया में सबसे मजबूत माने जाते हैं, और व्यापार, सुरक्षा व ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग निरंतर बढ़ रहा है।
5. चुनौतियाँ
अवैध प्रवासन, तस्करी और सीमा प्रबंधन की समस्याएँ।
तीस्ता जल बँटवारे का लंबित विवाद।
बांग्लादेश में चीन का बढ़ता प्रभाव।
व्यापार असंतुलन की चिंता।
6. आगे की राह
तीस्ता जल समझौते को अंतिम रूप देना।
भारत के पूर्वोत्तर को बांग्लादेश से जोड़ने के लिए संपर्क बढ़ाना।
भारत के निवेश और सहयोग से चीन के प्रभाव को संतुलित करना।
सांस्कृतिक कूटनीति और जन-संपर्क को बढ़ावा देना।
ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन में सहयोग बढ़ाना।