भारत–बांग्लादेश संबंध: वस्तुनिष्ठ एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Hindi)
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
प्रश्न 1. भारत–बांग्लादेश मैत्री, सहयोग और शांति संधि पर हस्ताक्षर कब हुए थे?
विकल्प: a) 1971 b) 1972 c) 1975 d) 1996
उत्तर: b) 1972
व्याख्या: यह संधि बांग्लादेश की स्वतंत्रता के बाद घनिष्ठ संबंध स्थापित करने हेतु हुई।
प्रश्न 2. बांग्लादेश का मुक्ति संग्राम किस वर्ष हुआ था?
विकल्प: a) 1965 b) 1971 c) 1974 d) 1977
उत्तर: b) 1971
व्याख्या: भारत ने पाकिस्तान के विरुद्ध बांग्लादेश का समर्थन किया, जिसके परिणामस्वरूप स्वतंत्रता मिली।
प्रश्न 3. गंगा जल संधि भारत और बांग्लादेश के बीच कब हुई?
विकल्प: a) 1975 b) 1982 c) 1996 d) 2001
उत्तर: c) 1996
व्याख्या: इससे फरक्का पर गंगा के जल बँटवारे का समाधान हुआ।
प्रश्न 4. किस नदी का जल-बँटवारा विवाद अब भी लंबित है?
विकल्प: a) तीस्ता b) ब्रह्मपुत्र c) मेघना d) यमुना
उत्तर: a) तीस्ता
व्याख्या: यह समझौता भारत की आंतरिक राजनीति के कारण अभी तक लंबित है।
प्रश्न 5. भारत–बांग्लादेश भूमि सीमा समझौता (LBA) कब हुआ था?
विकल्प: a) 1974 b) 1996 c) 2011 d) 2015
उत्तर: d) 2015
व्याख्या: इससे दशकों पुराने छिटमहल विवाद का शांतिपूर्ण समाधान हुआ।
प्रश्न 6. भारत–बांग्लादेश समुद्री सीमा विवाद का समाधान किस वर्ष हुआ?
विकल्प: a) 2009 b) 2012 c) 2014 d) 2016
उत्तर: c) 2014
व्याख्या: संयुक्त राष्ट्र पंचाट ने निर्णय दिया जो बांग्लादेश के पक्ष में रहा।
प्रश्न 7. भारत–बांग्लादेश संपर्क परियोजनाओं से किस कॉरिडोर को लाभ मिला है?
विकल्प: a) उत्तर-पूर्व भारत कॉरिडोर b) खैबर कॉरिडोर c) मलक्का जलडमरूमध्य कॉरिडोर d) कश्मीर कॉरिडोर
उत्तर: a) उत्तर-पूर्व भारत कॉरिडोर
व्याख्या: भारत का पूर्वोत्तर बांग्लादेश से सीधे जुड़ता है।
प्रश्न 8. भारत–बांग्लादेश सीमा की लंबाई लगभग कितनी है?
विकल्प: a) 1,750 किमी b) 2,900 किमी c) 3,500 किमी d) 4,096 किमी
उत्तर: d) 4,096 किमी
व्याख्या: भारत की सबसे लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा।
प्रश्न 9. कौन-सा भारतीय शहर बस और रेल मार्ग से सीधे ढाका से जुड़ा है?
विकल्प: a) अगरतला b) कोलकाता c) गुवाहाटी d) सिलीगुड़ी
उत्तर: b) कोलकाता
व्याख्या: कोलकाता–ढाका मार्ग सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करता है।
प्रश्न 10. बांग्लादेश में भारत के लिए सबसे बड़ी सामरिक चुनौती कौन-सी है?
विकल्प: a) अमेरिका का निवेश b) चीन की अवसंरचना परियोजनाएँ c) नेपाल का प्रभाव d) श्रीलंका के बंदरगाह समझौते
उत्तर: b) चीन की अवसंरचना परियोजनाएँ
व्याख्या: बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में चीन की बढ़ती भूमिका भारत के लिए चिंता का विषय है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न: भारत–बांग्लादेश संबंधों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि लिखिए।
उत्तर:
भारत–बांग्लादेश संबंधों की जड़ें 1971 के मुक्ति संग्राम में निहित हैं, जब भारत ने बांग्लादेश की स्वतंत्रता में निर्णायक भूमिका निभाई। भारत ने मुक्ति बाहिनी का समर्थन किया और संघर्ष के दौरान लाखों विस्थापित लोगों को शरण दी। दिसंबर 1971 में भारतीय सेना के हस्तक्षेप के बाद पाकिस्तान ने आत्मसमर्पण किया और बांग्लादेश का जन्म हुआ। इससे दोनों देशों के बीच गहरा भावनात्मक और रणनीतिक संबंध बना।
1972 में दोनों देशों ने मैत्री, सहयोग और शांति संधि पर हस्ताक्षर किए, जिसने द्विपक्षीय संबंधों को संस्थागत रूप दिया। यह संधि आपसी सम्मान, आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग तथा क्षेत्रीय शांति पर आधारित थी। समय के साथ संबंध परिपक्व हुए और व्यापार, संपर्क तथा सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ा।
सांस्कृतिक संबंध भी महत्वपूर्ण रहे हैं। साझा बंगाली धरोहर, भाषा और परंपराएँ दोनों देशों को जोड़ती हैं। शेख मुजीबुर रहमान और इंदिरा गांधी जैसे नेताओं ने प्रारंभिक सहयोग को आकार दिया। यद्यपि कभी-कभी जल और सीमा विवाद सामने आए, 1971 का विश्वास अब भी संबंधों की नींव है।
आज भारत और बांग्लादेश दक्षिण एशिया में सबसे व्यापक साझेदारी बनाए रखते हैं, जहाँ ऐतिहासिक संबंध आधुनिक चुनौतियों जैसे प्रवासन, व्यापार असंतुलन और चीन की बढ़ती उपस्थिति के साथ संतुलित होते हैं।
प्रश्न: भारत–बांग्लादेश के बीच जल बँटवारे के मुद्दों की चर्चा कीजिए।
उत्तर:
भारत और बांग्लादेश के बीच जल बँटवारा एक संवेदनशील मुद्दा रहा है क्योंकि दोनों देशों में 50 से अधिक साझा नदियाँ हैं। इससे सहयोग की आवश्यकता बढ़ जाती है, लेकिन यह राजनीति के कारण चुनौतीपूर्ण है।
सबसे सफल समझौता 1996 की गंगा जल संधि है, जिसने फरक्का पर गंगा के जल बँटवारे का ढाँचा तय किया। यह संधि 30 वर्षों के लिए लागू की गई और इसे न्यायसंगत वितरण का उदाहरण माना जाता है।
हालाँकि तीस्ता नदी का विवाद अभी भी अनसुलझा है। 2011 में एक प्रारूप समझौते पर चर्चा हुई, लेकिन पश्चिम बंगाल के विरोध के कारण यह पूरा नहीं हो सका। बांग्लादेश के लिए तीस्ता का जल उसके उत्तरी जिलों की कृषि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए यह एक राजनीतिक प्राथमिकता है।
अन्य नदियों जैसे फेनी, मनु और मुहुरी पर भी उपयोग संबंधी विवाद हुए हैं। संयुक्त नदी आयोग जैसे तंत्र मौजूद हैं, लेकिन घरेलू राजनीति और प्रतिस्पर्धी माँगों के कारण प्रगति धीमी है।
जल विवादों का समाधान न केवल कृषि और आजीविका के लिए बल्कि आपसी विश्वास के लिए भी आवश्यक है। यदि तीस्ता समझौता हो जाता है तो यह द्विपक्षीय सौहार्द को मजबूत करेगा और साझा नदियों के प्रबंधन में क्षेत्रीय सहयोग का उदाहरण बनेगा।
प्रश्न: भारत–बांग्लादेश भूमि सीमा समझौता (2015) का महत्व समझाइए।
उत्तर:
2015 का भूमि सीमा समझौता (LBA) भारत–बांग्लादेश संबंधों में ऐतिहासिक उपलब्धि थी, जिसने दुनिया के सबसे जटिल सीमा विवादों में से एक का समाधान किया। दशकों तक दोनों देशों में छिटमहल या ‘चिटमहल’ थे—ऐसे छोटे क्षेत्र जो एक देश के भीतर दूसरे देश के अधीन थे। इन क्षेत्रों में रहने वाले लोग सरकारी सेवाओं और नागरिक अधिकारों से वंचित थे।
2015 के समझौते से 162 छिटमहलों का शांतिपूर्ण आदान-प्रदान हुआ और लगभग 50,000 निवासियों को भारत या बांग्लादेश की नागरिकता चुनने का अधिकार मिला। अधिकांश लोग वहीं रहकर अपने भौगोलिक देश की नागरिकता लेने को तैयार हुए।
यह समझौता राजनीतिक इच्छाशक्ति और आपसी विश्वास का प्रतीक था, जिसने 1947 के विभाजन से चले आ रहे विवाद का अंत किया। इससे सीमा प्रबंधन बेहतर हुआ, अवैध गतिविधियाँ कम हुईं और सुरक्षा सहयोग बढ़ा।
LBA दक्षिण एशिया में सफल कूटनीति का प्रतीक बना, जिससे यह सिद्ध हुआ कि जटिल विवाद बातचीत और सद्भाव से हल किए जा सकते हैं। इससे संपर्क और ऊर्जा सहयोग जैसे अन्य क्षेत्रों में भी प्रगति का मार्ग प्रशस्त हुआ।
इस प्रकार, LBA ने भारत–बांग्लादेश संबंधों को मजबूत किया और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित किया।
प्रश्न: भारत–बांग्लादेश संबंधों की प्रमुख चुनौतियाँ बताइए।
उत्तर:
भारत–बांग्लादेश संबंध मजबूत होने के बावजूद कई चुनौतियाँ हैं, जिनका संवेदनशील तरीके से समाधान आवश्यक है।
पहली चुनौती सीमा प्रबंधन है। अवैध प्रवासन, मानव तस्करी और तस्करी 4,096 किमी लंबी सीमा पर प्रमुख समस्याएँ हैं। सीमा सुरक्षा बलों पर सीमा पार हत्याओं को लेकर भी आलोचना होती है।
दूसरी चुनौती तीस्ता नदी का विवाद है। बांग्लादेश के लिए जल बँटवारा राजनीतिक प्राथमिकता है, जबकि भारत में पश्चिम बंगाल इसका विरोध करता है। यह विवाद द्विपक्षीय सहयोग की संभावना को सीमित करता है।
तीसरी चुनौती चीन की बढ़ती भूमिका है। चीन बांग्लादेश में अवसंरचना, बंदरगाह और रक्षा आपूर्ति में निवेश कर रहा है, जिससे बांग्लादेश उसकी बेल्ट एंड रोड पहल का महत्वपूर्ण भागीदार बन रहा है।
चौथी चुनौती व्यापार असंतुलन है। भारत से आयात अधिक और निर्यात कम होने से बांग्लादेश चिंतित रहता है।
पाँचवीं चुनौती घरेलू राजनीति है। बांग्लादेश में विपक्षी दल कभी-कभी भारत की भूमिका की आलोचना करते हैं।
कुल मिलाकर, भारत को सुरक्षा उपायों, न्यायसंगत जल-बँटवारे और समावेशी आर्थिक सहयोग के माध्यम से विश्वास और सहयोग बनाए रखना होगा।
प्रश्न: भारत–बांग्लादेश संबंधों को मजबूत करने के उपाय सुझाइए।
उत्तर:
भारत और बांग्लादेश को संबंधों को मजबूत करने के लिए दूरदर्शी रणनीति अपनानी होगी।
पहला, तीस्ता जल विवाद का समाधान प्राथमिकता होनी चाहिए। न्यायसंगत समझौता विश्वास बढ़ाएगा और भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाएगा।
दूसरा, रेल, सड़क और जलमार्ग के माध्यम से भारत के पूर्वोत्तर और बांग्लादेश को जोड़ने से आर्थिक लाभ होंगे और क्षेत्रीय बाज़ार एकीकृत होंगे।
तीसरा, व्यापार असंतुलन दूर करने के लिए भारत को बांग्लादेशी वस्तुओं को अधिक बाज़ार पहुँच देनी चाहिए। वस्त्र, औषधि और आईटी में संयुक्त उपक्रम मददगार होंगे।
चौथा, भारत को चीन के प्रभाव का संतुलन करने के लिए समय पर अवसंरचना सहयोग और वित्तीय समर्थन देना चाहिए।
पाँचवाँ, सांस्कृतिक और शैक्षिक आदान-प्रदान बढ़ाना चाहिए। अधिक छात्रवृत्ति, जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त शोध और पर्यटन सहयोग दोनों देशों को और करीब लाएँगे।
अंत में, क्षेत्रीय सुरक्षा और आपदा प्रबंधन में सहयोग गहरा होना चाहिए। आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त प्रयास और जलवायु-लचीलापन परियोजनाएँ संबंधों की मजबूती को दर्शाएँगी।
इन कदमों से भारत–बांग्लादेश संबंध आपसी विश्वास, साझा विकास और सामरिक स्थिरता का मॉडल बन सकते हैं।