Course Content
India’s Relations with Pakistan
Covers the historical background, major disputes, wars, cooperation agreements, and current challenges in India–Pakistan relations. Includes bilingual notes and board-style Q&A for conceptual clarity and exam preparation.
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India’s Relations with China
Detailed coverage of India–China relations, including Panchsheel Agreement, 1962 War, Doklam, Galwan clash, cooperation in BRICS/SCO, challenges, and future outlook. Bilingual format with summaries and practice questions.
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India’s Relations with Nepal
Explains historical, cultural, and economic ties, the 1950 Treaty of Peace and Friendship, border disputes (Kalapani, Susta), constitutional issues, and current challenges. Includes bilingual notes and practice Q&A.
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International Relations

भारत–म्यांमार संबंध: वस्तुनिष्ठ एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Hindi)

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

प्रश्न 1. म्यांमार 1937 तक किसका हिस्सा था?

विकल्प: a) ब्रिटिश बर्मा   b) ब्रिटिश भारत   c) ब्रिटिश मलाया   d) ब्रिटिश सीलोन

उत्तर: b) ब्रिटिश भारत

व्याख्या: म्यांमार 1937 तक ब्रिटिश भारत का हिस्सा था और बाद में 1948 में स्वतंत्र हुआ।

प्रश्न 2. भारत और म्यांमार ने राजनयिक संबंध कब स्थापित किए?

विकल्प: a) 1947   b) 1948   c) 1950   d) 1952

उत्तर: b) 1948

व्याख्या: म्यांमार की स्वतंत्रता के तुरंत बाद राजनयिक संबंध स्थापित किए गए।

प्रश्न 3. भारत और म्यांमार की सीमा की लंबाई लगभग कितनी है?

विकल्प: a) 543 किमी   b) 1,000 किमी   c) 1,643 किमी   d) 2,200 किमी

उत्तर: c) 1,643 किमी

व्याख्या: भारत–म्यांमार सीमा अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम से गुजरती है।

प्रश्न 4. भारत की कौन-सी नीति म्यांमार को दक्षिण-पूर्व एशिया का द्वार मानती है?

विकल्प: a) पड़ोस पहले नीति   b) लुक ईस्ट नीति   c) एक्ट ईस्ट नीति   d) SAGAR

उत्तर: c) एक्ट ईस्ट नीति

व्याख्या: भौगोलिक स्थिति के कारण म्यांमार भारत की एक्ट ईस्ट नीति में केंद्रीय भूमिका निभाता है।

प्रश्न 5. भारत के पूर्वोत्तर को बंगाल की खाड़ी से जोड़ने वाली कौन-सी परियोजना है?

विकल्प: a) त्रिपक्षीय राजमार्ग   b) कालादान मल्टी-मोडल परियोजना   c) BIMSTEC कॉरिडोर   d) ईस्ट-वेस्ट राजमार्ग

उत्तर: b) कालादान मल्टी-मोडल परियोजना

व्याख्या: यह कोलकाता बंदरगाह से म्यांमार के सिटवे तक और फिर भारत के पूर्वोत्तर से जुड़ती है।

प्रश्न 6. भारत–म्यांमार–थाईलैंड को जोड़ने वाला राजमार्ग कौन-सा है?

विकल्प: a) BIMSTEC राजमार्ग   b) त्रिपक्षीय राजमार्ग   c) पूर्व एशिया कॉरिडोर   d) दक्षिण एशिया राजमार्ग

उत्तर: b) त्रिपक्षीय राजमार्ग

व्याख्या: भारत–म्यांमार–थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने हेतु है।

प्रश्न 7. भारत में शरणार्थी प्रवाह का कारण कौन-सा संकट रहा है?

विकल्प: a) नागा विद्रोह   b) रोहिंग्या संकट   c) सैन्य तख्तापलट   d) मादक पदार्थ तस्करी

उत्तर: b) रोहिंग्या संकट

व्याख्या: रोहिंग्या समस्या के कारण भारत में शरणार्थियों का प्रवाह हुआ।

प्रश्न 8. भारत और म्यांमार संयुक्त अभियान किसके विरुद्ध चलाते हैं?

विकल्प: a) मादक पदार्थ तस्करी   b) समुद्री डकैती   c) उग्रवादी समूह   d) अवैध खनन

उत्तर: c) उग्रवादी समूह

व्याख्या: भारतीय उग्रवादी समूह म्यांमार की भूमि का उपयोग करते रहे हैं, जिन्हें संयुक्त अभियानों से रोका गया।

प्रश्न 9. म्यांमार में भारत के लिए सबसे बड़ी सामरिक चुनौती किस देश का प्रभाव है?

विकल्प: a) अमेरिका   b) रूस   c) चीन   d) जापान

उत्तर: c) चीन

व्याख्या: चीन का बंदरगाह, पाइपलाइन और सैन्य सहयोग म्यांमार में बढ़ता प्रभाव भारत के लिए चुनौती है।

प्रश्न 10. कौन-सा क्षेत्रीय संगठन भारत और म्यांमार दोनों को जोड़ता है?

विकल्प: a) BIMSTEC   b) SAARC   c) ASEAN   d) SCO

उत्तर: a) BIMSTEC

व्याख्या: BIMSTEC (Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation) में भारत और म्यांमार दोनों शामिल हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न: भारत–म्यांमार संबंधों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि बताइए।

उत्तर:

भारत और म्यांमार के संबंध गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक आधार पर टिके हैं। तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में सम्राट अशोक के दूतों द्वारा म्यांमार में बौद्ध धर्म का प्रचार हुआ, जो दोनों देशों के बीच सबसे मजबूत सांस्कृतिक बंधन बना। भारत और म्यांमार के बीच तटीय व्यापार सदियों से चलता रहा और आर्थिक परस्पर निर्भरता बनी रही।

औपनिवेशिक काल में म्यांमार 1937 तक ब्रिटिश भारत का हिस्सा था। इस दौरान बड़ी संख्या में भारतीय मजदूर वहाँ गए और सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभाव बढ़ा। 1948 में स्वतंत्रता मिलने के बाद भारत ने सबसे पहले राजनयिक संबंध स्थापित किए। प्रारंभिक संबंध सांस्कृतिक जुड़ाव और उपनिवेशवाद की साझा विरासत से मजबूत बने।

हालाँकि, लंबे सैन्य शासन ने संबंधों में चुनौतियाँ पैदा कीं। फिर भी भौगोलिक निकटता और साझा हितों के कारण संबंध जारी रहे। आज भारत म्यांमार को अपनी ‘एक्ट ईस्ट नीति’ और दक्षिण-पूर्व एशिया से जुड़ाव का सेतु मानता है।

प्रश्न: भारत–म्यांमार संबंधों में सीमा और विद्रोह की चुनौतियों की व्याख्या कीजिए।

उत्तर:

भारत और म्यांमार की 1,643 किमी लंबी सीमा चार भारतीय राज्यों से होकर गुजरती है। यह सीमा व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के साथ-साथ सुरक्षा चुनौतियाँ भी उत्पन्न करती है। इस सीमा पर तस्करी, अवैध प्रवासन और मानव तस्करी जैसी गतिविधियाँ प्रचलित हैं।

सबसे गंभीर समस्या यह है कि भारत के पूर्वोत्तर के उग्रवादी समूह म्यांमार की भूमि का उपयोग अपने ठिकानों के रूप में करते हैं। NSCN-K और ULFA जैसे समूह म्यांमार से हमले करते रहे हैं। इस कारण भारत और म्यांमार ने संयुक्त सैन्य अभियान, खुफिया जानकारी साझा करना और सीमा पर निगरानी बढ़ाई है।

विद्रोह की समस्या को ‘गोल्डन ट्राएंगल’ से आने वाली मादक पदार्थ तस्करी ने और जटिल बना दिया है। इस छिद्रयुक्त सीमा को मजबूत करने के लिए बेहतर बुनियादी ढाँचा, स्थानीय सहयोग और सुरक्षा बलों में विश्वास जरूरी है।

प्रश्न: भारत–म्यांमार के बीच संपर्क परियोजनाओं के महत्व का मूल्यांकन कीजिए।

उत्तर:

भारत–म्यांमार संबंधों में संपर्क परियोजनाएँ केंद्रीय भूमिका निभाती हैं, क्योंकि ये भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ और क्षेत्रीय एकीकरण से जुड़ी हैं। सबसे महत्वपूर्ण पहल कालादान मल्टी-मोडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट परियोजना है, जो कोलकाता बंदरगाह को म्यांमार के सिटवे बंदरगाह और फिर कालादान नदी के जरिए मिजोरम से जोड़ती है। इससे भारत के पूर्वोत्तर को बंगाल की खाड़ी तक पहुँच मिलेगी और ‘सिलिगुड़ी कॉरिडोर’ पर निर्भरता घटेगी।

दूसरी प्रमुख पहल भारत–म्यांमार–थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग है। इसके पूरा होने पर यह मणिपुर के मोरेह से थाईलैंड के मै सॉट तक म्यांमार के रास्ते जुड़ाव देगा। यह परियोजना व्यापार, पर्यटन और जन-संपर्क को बढ़ाएगी।

इन परियोजनाओं का सामरिक महत्व भी है, क्योंकि ये म्यांमार में चीन के प्रभाव को संतुलित करने में मदद करेंगी। हालाँकि देरी हो रही है, इनके पूरा होने से संपर्क, आर्थिक एकीकरण और क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूती मिलेगी।

प्रश्न: 2021 के सैन्य तख्तापलट पर भारत की प्रतिक्रिया का विश्लेषण कीजिए।

उत्तर:

2021 में म्यांमार में हुए सैन्य तख्तापलट ने भारत के लिए कूटनीतिक चुनौती पैदा की। एक ओर भारत लोकतंत्र का समर्थन करता है और नागरिक नेताओं के दमन को लेकर चिंतित था, दूसरी ओर म्यांमार भारत के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ोसी है, जहाँ सुरक्षा सहयोग, संपर्क परियोजनाएँ और पूर्वोत्तर में विद्रोह-रोधी प्रयास जुड़े हुए हैं।

भारत ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाया। लोकतांत्रिक पिछड़ेपन पर चिंता जताई, लेकिन सैन्य सरकार की सीधी निंदा नहीं की ताकि कामकाजी संबंध बनाए रखे जा सकें। भारत ने अपनी प्राथमिकताओं में सीमा की स्थिरता, निवेशों की सुरक्षा और चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकना शामिल किया।

भारत ने लोकतांत्रिक शक्तियों और सैन्य सरकार दोनों से संवाद बनाए रखा और शांतिपूर्ण समाधान पर जोर दिया। यह व्यवहारिक नीति भारत की रणनीतिक गणना को दर्शाती है—लोकतंत्र का समर्थन, परन्तु सामरिक हितों को भी सुरक्षित रखना।

प्रश्न: भारत–म्यांमार संबंधों को मजबूत करने के उपाय सुझाइए।

उत्तर:

भारत और म्यांमार के संबंधों को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए जा सकते हैं। पहला, संपर्क परियोजनाओं को तेज़ करना होगा, जैसे कालादान परियोजना और त्रिपक्षीय राजमार्ग। ये भारत के पूर्वोत्तर को दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ेंगे और आर्थिक वृद्धि को प्रोत्साहित करेंगे।

दूसरा, सीमा प्रबंधन में सुधार लाना होगा। संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाना, सुरक्षा तंत्र मजबूत करना और म्यांमार के साथ सहयोग बढ़ाना आवश्यक है। संयुक्त प्रयासों से विद्रोही समूहों और मादक पदार्थ तस्करी को नियंत्रित किया जा सकता है।

तीसरा, भारत को आर्थिक सहयोग बढ़ाना चाहिए। व्यापार, ऊर्जा और अवसंरचना में निवेश करके म्यांमार को चीन के विकल्प उपलब्ध कराए जा सकते हैं।

चौथा, सांस्कृतिक कूटनीति को गहरा करना चाहिए। साझा बौद्ध धरोहर और पर्यटन को बढ़ावा देना तथा शिक्षा व छात्रवृत्ति कार्यक्रमों से आपसी सद्भावना बढ़ेगी।

पाँचवाँ, भारत को लोकतांत्रिक शक्तियों और सैन्य सरकार दोनों से संतुलित संवाद रखना चाहिए ताकि स्थिरता बनी रहे और लोकतांत्रिक आकांक्षाओं को भी समर्थन मिले।