समकालीन दक्षिण एशिया
सारांश (हिंदी)
दक्षिण एशिया में भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका और मालदीव शामिल हैं। सांस्कृतिक और ऐतिहासिक समानताओं के बावजूद यह क्षेत्र राजनीतिक अस्थिरता, जातीय संघर्षों, युद्धों और आर्थिक चुनौतियों का सामना करता रहा है। साथ ही, यह क्षेत्रीय सहयोग के उदाहरण भी प्रस्तुत करता है जैसे सार्क।
1. दक्षिण एशिया का अर्थ
– दक्षिण एशिया में विश्व की लगभग पाँचवीं जनसंख्या निवास करती है और इसका साझा इतिहास व संस्कृति है।
– यहाँ विविधता पाई जाती है: भारत सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जबकि अन्य देशों में लोकतंत्र, राजतंत्र और सैन्य शासन का मिश्रण रहा है।
– गरीबी, अशिक्षा, बेरोजगारी और जनसंख्या वृद्धि जैसी समस्याएँ क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित करती हैं।
2. दक्षिण एशियाई देशों की राजनीतिक व्यवस्था
– भारत: 1947 से स्थिर लोकतंत्र, मजबूत संविधान और धर्मनिरपेक्ष राजनीति।
– पाकिस्तान: सैन्य तख्तापलट, अस्थिरता और निर्वाचित सरकारों का बार-बार पतन।
– बांग्लादेश: 1971 में स्वतंत्रता; सैन्य शासन और लोकतंत्र के बीच उतार-चढ़ाव; अब अपेक्षाकृत स्थिर।
– नेपाल: राजतंत्र से लोकतंत्र तक का सफर; माओवादी संघर्ष; अब गणराज्य।
– श्रीलंका: लोकतंत्र, लेकिन लंबे समय तक सिंहली–तमिल संघर्ष।
– भूटान: राजतंत्र से संवैधानिक लोकतंत्र में परिवर्तन; सकल राष्ट्रीय खुशी पर जोर।
– मालदीव: छोटा द्वीपीय राष्ट्र; अधिनायकवाद और लोकतंत्र के बीच बदलाव।
3. दक्षिण एशिया में संघर्ष और मुद्दे
a) भारत–पाकिस्तान: विभाजन और कश्मीर विवाद; 1947–48, 1965, 1971 और 1999 के युद्ध; आतंकवाद, सियाचिन और सिंधु जल संधि मुद्दे।
b) भारत–बांग्लादेश: 1971 में स्वतंत्रता में भारत की भूमिका; अवैध प्रवास, नदियों का जल बंटवारा, सीमा विवाद; सहयोग भी बढ़ा।
c) भारत–श्रीलंका: तमिल–सिंहली संघर्ष; भारत ने शांति सेना भेजी (1987–90); अब आर्थिक और समुद्री सहयोग।
d) भारत–नेपाल: खुले सीमा संबंध, सांस्कृतिक निकटता; व्यापार, नदियों और राजनीतिक संदेह मुद्दे।
e) भारत–भूटान: अत्यंत सौहार्दपूर्ण संबंध; भारत भूटान के विकास में मदद करता है।
f) भारत–मालदीव: भौगोलिक और रणनीतिक निकटता; भारत ने 1988 के तख्तापलट प्रयास को विफल किया।
4. जातीय संघर्ष
– श्रीलंका: LTTE और सरकार के बीच 25 वर्षों तक गृहयुद्ध; 2009 में समाप्त।
– नेपाल: 1996–2006 तक माओवादी विद्रोह; राजतंत्र की समाप्ति।
– पाकिस्तान: बलूच विद्रोह और धार्मिक उग्रवाद।
5. सार्क और क्षेत्रीय सहयोग
– सार्क की स्थापना 1985 में हुई (7 सदस्य; 2007 में अफगानिस्तान शामिल हुआ)।
– उद्देश्य: आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक सहयोग।
– सार्क ने SAFTA (मुक्त व्यापार क्षेत्र) बनाया, परंतु भारत–पाकिस्तान तनाव के कारण सीमित सफलता।
– क्षेत्रीय व्यापार कुल व्यापार का 5% से कम।
– फिर भी, यह संवाद और सहयोग का मंच है।
6. दक्षिण एशिया में बाहरी प्रभाव
– अमेरिका: पाकिस्तान का रणनीतिक सहयोगी; भारत से बढ़ते संबंध।
– चीन: पाकिस्तान का सहयोगी; नेपाल, श्रीलंका और मालदीव में निवेश (BRI के अंतर्गत)।
– भारत: सबसे बड़ा देश और क्षेत्रीय नेतृत्व की भूमिका, पड़ोसी देशों की चिंताओं का संतुलन आवश्यक।
7. मुख्य बिंदु
– लोकतंत्र असमान रूप से फैला है।
– प्रमुख संघर्ष: भारत–पाकिस्तान प्रतिद्वंद्विता, श्रीलंका का जातीय युद्ध।
– सार्क द्वारा क्षेत्रीय सहयोग की कोशिश, परंतु सीमित सफलता।
– अमेरिका और चीन जैसे बाहरी देशों का प्रभाव।
– भारत क्षेत्रीय शांति और स्थिरता का केंद्रीय कारक है।