SECTION C — हिंदी (100 शब्द के उत्तर)
प्र14. आप कैसे कह सकते हैं कि सिंधु लिपि एक रहस्यमयी लिपि थी?
उत्तर (लगभग 100 शब्द):
सिंधु लिपि को रहस्यमयी इसलिए कहा जाता है क्योंकि आज तक इसे पढ़ा नहीं जा सका है। इस लिपि के अधिकांश लेख बहुत छोटे हैं, जिनमें केवल 3–5 संकेत होते हैं, जिससे अर्थ, व्याकरण या संदर्भ को समझना कठिन हो जाता है। कोई द्विभाषी अभिलेख (जैसे रौज़ेटा स्टोन) नहीं मिला है जो इसके पाठ को समझने में सहायता करे। इसके संकेत किसी ज्ञात प्राचीन लिपि से मिलते-जुलते नहीं हैं। भाषा-आधार भी अज्ञात है। लंबी लिखित सामग्री, साहित्यिक संदर्भ या निरंतरता के अभाव ने इसे विश्व की सबसे रहस्यमयी लिपियों में से एक बना दिया है।
व्याख्या:
संक्षिप्त लेख, द्विभाषी प्रमाण की कमी, अपरिचित संकेत और भाषा-अनिश्चितता इसे रहस्यमयी बनाते हैं।
OR / अथवा
हड़प्पा सभ्यता की सबसे विशिष्ट विशेषता नगरों का विकास कैसे था? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर (लगभग 100 शब्द):
हड़प्पा सभ्यता की सबसे विशिष्ट विशेषता उसके सुव्यवस्थित नगर थे। मोहनजोदड़ो और हड़प्पा जैसे नगर ग्रिड-पद्धति पर बसाए गए थे, जिनमें सड़कें एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं। उन्नत जलनिकासी व्यवस्था, पक्की ईंटों का मानकीकरण और आवासीय व सार्वजनिक क्षेत्रों का अलग-अलग नियोजन उनकी विशेषताएँ थीं। ग्रेट बाथ, अन्नागारों और दुर्ग-मंचों से मजबूत प्रशासन का पता चलता है। दूर-दूर के नगरों में भी निर्माण सामग्री, तौल-नाप और नगर-रचना में समानता दिखाई देती है। इस प्रकार, नगरों का व्यवस्थित विकास इस सभ्यता की सबसे अनोखी उपलब्धि थी।
व्याख्या:
उन्नत नगर-योजना, जलनिकासी, सार्वजनिक संरचनाएँ और मानकीकरण इसकी अनोखी पहचान हैं।
प्र15. सूफीवाद के विकास की व्याख्या कीजिए।
उत्तर (लगभग 100 शब्द):
सूफीवाद इस्लाम के भीतर ऐसा आध्यात्मिक आंदोलन था जो प्रेम, भक्ति और ईश्वर से व्यक्तिगत संबंध पर जोर देता था। 8वीं शताब्दी के बाद यह तेजी से फैला। सूफी संतों ने ख़ानक़ाहें स्थापित कीं, जहाँ साधना, जप, सेवा और सरल जीवन का अभ्यास होता था। चिश्ती, सुहरवर्दी, कादिरी और नक्शबंदी जैसी कई परंपराएँ विकसित हुईं। सूफी संतों ने कठोर धार्मिक आचारों का विरोध किया और समानता तथा करुणा का संदेश दिया। भारत में स्थानीय लोगों से घनिष्ठ संपर्क, समन्वयवादी दृष्टि और प्रेम का संदेश होने के कारण सूफीवाद व्यापक रूप से लोकप्रिय हुआ।
व्याख्या:
आध्यात्मिक साधना, ख़ानक़ाहें, विभिन्न सिलसिले और समानता के संदेश ने सूफीवाद को फैलाया।
OR / अथवा
भक्ति की प्रारम्भिक परम्पराओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर (लगभग 100 शब्द):
प्रारम्भिक भक्ति परम्पराएँ दक्षिण भारत में 6वीं से 9वीं शताब्दी के बीच उभरीं। आलवार (विष्णु भक्त) और नयनार (शिव भक्त) इन परम्पराओं के प्रमुख प्रतिनिधि थे। उन्होंने कर्मकांड, जाति-भेद और यज्ञों का विरोध करते हुए ईश्वर के प्रति व्यक्तिगत प्रेम और समर्पण पर बल दिया। भक्ति संतों ने तमिल भाषा में भक्तिगीत रचे, जिससे धर्म आम लोगों तक पहुँचा। भक्ति का मुख्य संदेश था—ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग प्रेम, भक्ति और समर्पण है, न कि जन्म या विद्वता। बाद में यह परंपरा पूरे भारत में फैलकर कबीर, मीरा और तुलसी जैसे संतों को प्रभावित करती है।
व्याख्या:
भक्ति ने समानता, भक्ति-प्रेम, स्थानीय भाषा और व्यक्तिगत आध्यात्मिक अनुभव पर बल दिया।
प्र16. 1857 के विद्रोह के संदर्भ में अवध के विद्रोह पर टिप्पणी कीजिए।
उत्तर (लगभग 100 शब्द):
1857 के विद्रोह में अवध सबसे सक्रिय क्षेत्रों में था। 1856 में ब्रिटिशों द्वारा अवध का विलय सैनिकों, जमींदारों, तालुकेदारों और किसानों के लिए बड़ा अपमान था। राजस्व बढ़ोतरी और पारंपरिक अधिकारों के छिन जाने से व्यापक असंतोष पैदा हुआ। विद्रोह शुरू होते ही अवध के सिपाहियों ने बगावत की और नवाब वाजिद अली शाह के पुत्र बिरजिस कादर को नेतृत्व दिया। लखनऊ, कानपुर और फैजाबाद विद्रोह के प्रमुख केंद्र बने। ग्रामीण और शहरी दोनों वर्गों की भागीदारी ने विद्रोह को अत्यंत व्यापक और प्रबल बना दिया।
व्याख्या:
विलय, अधिकारों की हानि और सभी वर्गों की एकजुटता ने अवध में विद्रोह को सशक्त बनाया।
OR / अथवा
1857 से संबंधित चित्रों से हमें क्या जानकारी मिलती है? लिखिए।
उत्तर (लगभग 100 शब्द):
1857 के विद्रोह से संबंधित चित्र—पेंटिंग, उत्कीर्णन, अंग्रेज़ी अखबारों के रेखाचित्र—उस समय की घटनाओं, नेताओं और भावनाओं को समझने में महत्वपूर्ण स्रोत हैं। इनमें दिल्ली की घेराबंदी, कानपुर और लखनऊ की लड़ाइयाँ, रानी लक्ष्मीबाई और नाना साहब जैसे नेताओं की भूमिका दिखाई देती है। अंग्रेज़ी चित्रों में विद्रोहियों को “दंगाई” दिखाया गया, जबकि भारतीय चित्रों में वीरता और बलिदान पर जोर दिया गया। इन चित्रों से हथियारों, पोशाकों, नगर-रचना और जन-भावनाओं का वास्तविक स्वरूप भी समझ में आता है। इस प्रकार, चित्र लिखित स्रोतों से परे इतिहास की मूल्यवान झलक देते हैं।
व्याख्या:
चित्र घटनाओं, नेताओं, ब्रिटिश दृष्टिकोण और भारतीय प्रतिरोध की बहु-आयामी झलक प्रदान करते हैं।
प्र17. भारत के संविधान में केन्द्र और राज्यों के बीच शक्तियों के विभाजन के लिए कौन-कौन सी सूचियाँ बनाई गईं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर (लगभग 100 शब्द):
भारतीय संविधान में केन्द्र और राज्यों के बीच शक्तियों के विभाजन के लिए तीन सूचियाँ बनाई गईं। संघ सूची में रक्षा, विदेश नीति, मुद्रा और संचार जैसे राष्ट्रीय महत्व के विषय शामिल हैं। राज्य सूची में पुलिस, कृषि, स्वास्थ्य और स्थानीय शासन जैसे राज्य-स्तरीय विषय आते हैं। समवर्ती सूची में शिक्षा, वन, विवाह कानून आदि विषय शामिल हैं जिन पर केन्द्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं। यह व्यवस्था सहकारी संघवाद सुनिश्चित करती है और प्रशासनिक संतुलन बनाए रखती है। संघ को राष्ट्रीय विषयों पर अधिक अधिकार दिए गए हैं, जबकि राज्य अपनी स्वायत्तता बनाए रखते हैं।
व्याख्या:
संघ, राज्य और समवर्ती तीन सूचियाँ शक्तियों का स्पष्ट विभाजन करती हैं।
OR / अथवा
संविधान सभा में भाषा के प्रश्न पर किस प्रकार की बहस हुई? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर (लगभग 100 शब्द):
संविधान सभा में भाषा का प्रश्न अत्यंत भावनात्मक और विवादास्पद था। कुछ सदस्य चाहते थे कि देवनागरी लिपि में हिंदी को राष्ट्रीय भाषा बनाया जाए। अन्य सदस्यों ने हिंदुस्तानी को अधिक समावेशी भाषा मानकर उसका समर्थन किया। दक्षिण भारत के प्रतिनिधियों ने हिंदी थोपे जाने का कड़ा विरोध किया, उन्हें अपने भाषाई अधिकारों और प्रशासनिक कठिनाइयों की चिंता थी। कई सदस्यों ने अंग्रेज़ी को कुछ समय तक जारी रखने की आवश्यकता बताई। अंततः समझौते के आधार पर हिंदी को आधिकारिक भाषा और अंग्रेज़ी को सहायक आधिकारिक भाषा के रूप में स्वीकार किया गया।
व्याख्या:
बहस हिंदी बनाम हिंदुस्तानी बनाम अंग्रेज़ी, क्षेत्रीय पहचान और राष्ट्रीय एकता के इर्द-गिर्द थी।