- स्वतंत्रता के समय चुनौतियाँ (1947)
- स्वतंत्रता: 14–15 अगस्त 1947।
- विभाजन के साथ – हिंसा, पलायन, सांप्रदायिक दंगे।
- तीन प्रमुख चुनौतियाँ:
- राष्ट्र-निर्माण – विविधता के बीच एकता।
- लोकतंत्र की स्थापना – संविधान, अधिकार, चुनाव।
- विकास व न्याय – ग़रीबों व पिछड़ों का उत्थान।
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- विभाजन: विस्थापन व पुनर्वास
- भारत और पाकिस्तान बने।
- पंजाब व बंगाल का बँटवारा।
- 80 लाख लोग विस्थापित, 5–10 लाख मारे गए।
- अल्पसंख्यकों में भय और हिंसा।
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- महात्मा गांधी की भूमिका
- उत्सवों की बजाय शांति-कार्य में लगे (कोलकाता व दिल्ली)।
- सांप्रदायिक सौहार्द्र पर बल।
- 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने हत्या की।
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- रियासतों का एकीकरण
- 565 रियासतें थीं।
- सरदार पटेल व वी.पी. मेनन ने नेतृत्व किया।
- अधिकांश ने एकीकरण पत्र (Instrument of Accession) पर हस्ताक्षर किए।
- जटिल मामले:
- जूनागढ़ → नवाब पाकिस्तान चाहता था, जनमत संग्रह से भारत में विलय।
- हैदराबाद → निज़ाम स्वतंत्र रहना चाहता था, ‘रज़ाकारों’ को सेना ने हराया (ऑपरेशन पोलो, 1948)।
- कश्मीर → महाराजा ने पाकिस्तान हमले (1947–48 युद्ध) के बाद भारत में विलय किया।
- मणिपुर → 1947 में एकीकरण, 1948 में चुनाव, 1949 में पूर्ण विलय।
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- राज्यों का पुनर्गठन
- भाषाई राज्यों की माँग बढ़ी।
- पोट्टी श्रीरामलु का आमरण अनशन (1952) → आंध्र राज्य (1953)।
- राज्यों का पुनर्गठन अधिनियम (1956) → 14 राज्य + 6 केंद्रशासित प्रदेश।
- बाद के पुनर्गठन:
- महाराष्ट्र व गुजरात (1960)
- पंजाब, हरियाणा, हिमाचल (1966)
- उत्तर-पूर्वी राज्य (नगालैंड 1963; मेघालय, मणिपुर, त्रिपुरा 1972; मिज़ोरम व अरुणाचल 1987)
- छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, झारखंड (2000)
- तेलंगाना (2014)
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- महत्व
- भाषाई राज्यों ने भारत की एकता को मज़बूत किया।
- राष्ट्र-निर्माण = लोकतंत्र + विविधता + न्याय।