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Class 12 Political science – contemporary world polities

प्रश्न 1. सोवियत संघ के विघटन के कारणों की व्याख्या कीजिए।

प्रस्तावना:
1991 में सोवियत संघ का विघटन 20वीं शताब्दी की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक था। इससे शीत युद्ध का अंत हुआ और वैश्विक शक्ति संतुलन बदल गया।

मुख्य भाग:
1. आर्थिक ठहराव – दीर्घकालीन मंदी, तकनीकी पिछड़ापन, भारी सैन्य खर्च।
2. राजनीतिक कमजोरी – एकदलीय शासन, भ्रष्टाचार, जवाबदेही का अभाव।
3. गोरबाचेव सुधार – पेरेस्त्रोइका और ग्लासनोस्त से अपेक्षाएँ बढ़ीं, पर राष्ट्रवाद भी मजबूत हुआ।
4. राष्ट्रवाद – बाल्टिक गणराज्य, यूक्रेन, जॉर्जिया ने स्वतंत्रता की माँग की।
5. असफल तख्तापलट (1991) – कम्युनिस्ट नेताओं की विफलता से सत्ता कमजोर हुई।
6. बोरिस येल्त्सिन – लोकतांत्रिक नेता के रूप में उभरे, रूस की संप्रभुता घोषित की।

निष्कर्ष:
आर्थिक, राजनीतिक और राष्ट्रवादी कारणों के साथ सुधारों की विफलता ने सोवियत संघ के पतन को जन्म दिया।

प्रश्न 2. शीत युद्ध की समाप्ति और सोवियत संघ के विघटन के परिणामों पर चर्चा कीजिए।

प्रस्तावना:
1991 में सोवियत संघ के विघटन ने शीत युद्ध का अंत किया और वैश्विक राजनीति को परिवर्तित कर दिया।

मुख्य भाग:
1. वैचारिक प्रतिस्पर्धा का अंत – पूँजीवाद प्रमुख हुआ।
2. एकध्रुवीय विश्व – अमेरिका एकमात्र महाशक्ति बना।
3. नए राज्यों का उदय – बाल्टिक और मध्य एशियाई गणराज्य स्वतंत्र हुए।
4. आर्थिक संक्रमण – शॉक थैरेपी से असमानता और गरीबी बढ़ी।
5. सुरक्षा संकट – चेचन्या, यूगोस्लाविया, जॉर्जिया में जातीय युद्ध।

निष्कर्ष:
द्विध्रुवीयता के अंत से लोकतंत्र के अवसर बढ़े, पर अस्थिरता और अमेरिकी वर्चस्व भी सामने आया।

प्रश्न 3. सोवियत संघ के विघटन का भारत पर क्या प्रभाव पड़ा?

प्रस्तावना:
सोवियत संघ का पतन भारत के लिए गहरा झटका था क्योंकि वह भारत का सबसे मज़बूत सहयोगी था।

मुख्य भाग:
1. विश्वसनीय सहयोगी का नुकसान – सोवियत संघ ने कश्मीर और अन्य मुद्दों पर भारत का समर्थन किया।
2. आर्थिक असर – रुपये-रूबल व्यापार समाप्त होने से विदेशी मुद्रा संकट।
3. रक्षा और प्रौद्योगिकी – रूस ने हथियार, परमाणु और अंतरिक्ष तकनीक उपलब्ध कराई।
4. विदेश नीति में बदलाव – भारत ने अमेरिका, यूरोप और एशिया से संबंध बढ़ाए।
5. रणनीतिक साझेदारी – रूस के साथ सहयोग जारी रहा।

निष्कर्ष:
भारत के लिए यह चुनौतियों और अवसरों दोनों का समय था। रूस सहयोगी बना रहा पर भारत ने वैश्विक संबंधों का विस्तार किया।

प्रश्न 4. “शॉक थैरेपी” क्या थी? इसके परिणामों का विश्लेषण कीजिए।

प्रस्तावना:
सोवियत संघ के पतन के बाद कई देशों ने अचानक आर्थिक सुधार अपनाए जिन्हें शॉक थैरेपी कहा गया।

मुख्य भाग:
1. परिभाषा – अचानक पूँजीवादी व्यवस्था की ओर बदलाव।
2. उपाय – निजीकरण, उदारीकरण, सब्सिडी हटाना।
3. परिणाम – उद्योग ध्वस्त, महँगाई, बेरोजगारी, माफिया का उदय।
4. क्षेत्रीय अंतर – बाल्टिक देशों ने प्रगति की, मध्य एशिया में तानाशाही बनी रही।

निष्कर्ष:
शॉक थैरेपी ने समृद्धि का वादा किया लेकिन गरीबी और असमानता बढ़ा दी।

प्रश्न 5. सोवियत संघ के पतन में गोरबाचेव के सुधारों की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

प्रस्तावना:
गोरबाचेव ने सोवियत संघ को आधुनिक बनाने के लिए सुधार लागू किए, पर इनसे विघटन तेज हो गया।

मुख्य भाग:
1. पेरेस्त्रोइका – आर्थिक पुनर्गठन।
2. ग्लासनोस्त – राजनीतिक खुलापन।
3. प्रभाव – अपेक्षाएँ बढ़ीं, राष्ट्रवाद मजबूत हुआ।
4. कमजोरी – सुधार बहुत धीमे या बहुत तेज माने गए।

निष्कर्ष:
गोरबाचेव सुधार पुनर्जीवन के बजाय विघटन का कारण बने।

प्रश्न 6. सोवियत संघ के विघटन में राष्ट्रवाद की भूमिका स्पष्ट कीजिए।

प्रस्तावना:
सोवियत संघ विविध गणराज्यों का संघ था, जहाँ राष्ट्रवाद ने विघटन में बड़ी भूमिका निभाई।

मुख्य भाग:
1. बाल्टिक देशों ने सबसे पहले स्वतंत्रता की माँग की।
2. पूर्वी गणराज्य जैसे यूक्रेन, जॉर्जिया ने भी स्वतंत्रता चाही।
3. रूसी वर्चस्व से असंतोष फैला।
4. राष्ट्रवाद तात्कालिक कारण बना।

निष्कर्ष:
लंबे समय से दबा हुआ राष्ट्रवाद गोरबाचेव सुधारों के दौरान उभर आया।

प्रश्न 7. 1991 के बाद अमेरिका के एकमात्र महाशक्ति बनने के वैश्विक परिणामों का वर्णन कीजिए।

प्रस्तावना:
सोवियत संघ के पतन के बाद अमेरिका एकमात्र महाशक्ति बना।

मुख्य भाग:
1. सैन्य शक्ति – अमेरिका ने इराक, अफगानिस्तान, यूगोस्लाविया में हस्तक्षेप किया।
2. आर्थिक प्रभुत्व – IMF, विश्व बैंक, WTO का प्रभाव बढ़ा।
3. लोकतंत्र का प्रसार – उदार लोकतंत्र को सर्वश्रेष्ठ मॉडल माना गया।
4. चुनौतियाँ – रूस, चीन, भारत ने बहुध्रुवीय विश्व की माँग की।

निष्कर्ष:
अमेरिकी प्रभुत्व बढ़ा लेकिन विरोध भी उत्पन्न हुआ।

प्रश्न 8. सोवियत संघ के पतन का विश्व राजनीति पर प्रभाव स्पष्ट कीजिए।

प्रस्तावना:
सोवियत संघ का पतन वैश्विक शक्ति और विचारधाराओं पर गहरा प्रभाव डालने वाला था।

मुख्य भाग:
1. द्विध्रुवीयता का अंत – गुट समाप्त हुए।
2. लोकतंत्र का प्रसार – कई नए संविधान बने।
3. संघर्ष – यूगोस्लाविया, चेचन्या, जॉर्जिया में युद्ध।
4. बहुध्रुवीय आकांक्षाएँ – रूस, चीन, भारत, यूरोपीय संघ का उदय।

निष्कर्ष:
सोवियत पतन से वैचारिक संघर्ष समाप्त हुआ लेकिन नए संकट पैदा हुए।

प्रश्न 9. सोवियत समाजवादी मॉडल और पश्चिमी पूँजीवाद की तुलना कीजिए।

प्रस्तावना:
शीत युद्ध में विश्व समाजवाद और पूँजीवाद में बँटा था।

मुख्य भाग:
1. सोवियत समाजवाद – राज्य स्वामित्व, नियोजित अर्थव्यवस्था, समानता, पर स्वतंत्रता का अभाव।
2. पश्चिमी पूँजीवाद – निजी स्वामित्व, बाजार आधारित अर्थव्यवस्था, उपभोक्तावाद, लोकतंत्र।
3. तुलना – USSR ने समानता दी पर नवाचार की कमी रही; पश्चिम ने समृद्धि दी पर असमानता बढ़ी।

निष्कर्ष:
दोनों मॉडल ने वैश्विक प्रतिस्पर्धा को जन्म दिया, अंततः सोवियत मॉडल कमजोर सिद्ध हुआ।

प्रश्न 10. द्विध्रुवीयता के अंत के बाद भारत की विदेश नीति की प्रतिक्रिया कीजिए।

प्रस्तावना:
सोवियत संघ के पतन के बाद भारत ने अपनी विदेश नीति में बदलाव किया।

मुख्य भाग:
1. रूस के साथ संबंध बनाए – रक्षा, परमाणु, अंतरिक्ष सहयोग।
2. विविधीकरण – अमेरिका, यूरोप और एशियाई देशों से संबंध बढ़े।
3. आर्थिक सुधार – 1991 के उदारीकरण ने वैश्वीकरण से जोड़ा।
4. रणनीतिक स्वायत्तता – स्वतंत्र विदेश नीति कायम रखी।

निष्कर्ष:
भारत ने पुराने रिश्ते बनाए रखते हुए नए अवसरों का लाभ उठाया।