अध्याय 4: अंतर्राष्ट्रीय संगठन
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (हिंदी, विस्तृत)
प्रश्न 1. संयुक्त राष्ट्र की स्थापना क्यों हुई? इसके मुख्य उद्देश्यों पर चर्चा कीजिए।
प्रस्तावना:
संयुक्त राष्ट्र (UN) की स्थापना 24 अक्तूबर 1945 को द्वितीय विश्व युद्ध के बाद शांति और सहयोग स्थापित करने के लिए हुई। यह असफल लीग ऑफ नेशंस का उत्तराधिकारी है।
मुख्य भाग:
– मुख्य उद्देश्य:
1. सामूहिक सुरक्षा के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय शांति बनाए रखना।
2. मानवाधिकारों, गरिमा और समानता को बढ़ावा देना।
3. आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और मानवीय क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना।
4. सदस्य राष्ट्रों को संवाद का मंच प्रदान करना।
5. संप्रभु समानता और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान को सुनिश्चित करना।
निष्कर्ष:
संयुक्त राष्ट्र वैश्विक मुद्दों पर वैधता और साझा मंच प्रदान करने वाला सबसे महत्वपूर्ण संगठन है।
प्रश्न 2. सुरक्षा परिषद की संरचना और कार्यप्रणाली स्पष्ट कीजिए।
प्रस्तावना:
सुरक्षा परिषद (SC) संयुक्त राष्ट्र का सबसे शक्तिशाली अंग है, जो शांति और सुरक्षा का दायित्व निभाता है।
मुख्य भाग:
– संरचना: 15 सदस्य – 5 स्थायी (अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, चीन) वीटो शक्ति के साथ, और 10 अस्थायी सदस्य 2 वर्ष के लिए चुने जाते हैं।
– कार्य:
– विवादों की जांच और समाधान की सिफारिश।
– प्रतिबंध, शांति स्थापना और सैन्य कार्रवाई की अनुमति।
– नए सदस्यों की स्वीकृति और महासचिव की नियुक्ति।
– वीटो शक्ति: किसी भी स्थायी सदस्य द्वारा निर्णय को रोकने की क्षमता, जिससे परिषद पर महाशक्तियों का दबदबा रहता है।
निष्कर्ष:
सुरक्षा परिषद 1945 की वास्तविकताओं को दर्शाती है; आज की दुनिया को प्रतिबिंबित करने के लिए सुधार आवश्यक हैं।
प्रश्न 3. संयुक्त राष्ट्र में सुधार क्यों आवश्यक हैं?
प्रस्तावना:
1945 के बाद से वैश्विक राजनीति बदल चुकी है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र की संरचना आज भी पुरानी है।
मुख्य भाग:
– सुधार के कारण:
1. सुरक्षा परिषद WWII की पाँच शक्तियों द्वारा नियंत्रित है; एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका का प्रतिनिधित्व कम है।
2. वीटो शक्ति अलोकतांत्रिक है।
3. भारत, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका जैसे उभरते देशों का स्थायी प्रतिनिधित्व नहीं है।
4. आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन और साइबर सुरक्षा जैसे नए मुद्दों के लिए अधिक समावेशी निर्णय की आवश्यकता है।
निष्कर्ष:
संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता और दक्षता बनाए रखने के लिए सुधार अनिवार्य हैं।
प्रश्न 4. सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के दावे पर चर्चा कीजिए।
प्रस्तावना:
भारत सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता की मांग लंबे समय से कर रहा है।
मुख्य भाग:
– भारत की दावेदारी के आधार:
1. सबसे बड़ा लोकतंत्र और 1.4 अरब से अधिक की जनसंख्या।
2. दूसरी सबसे बड़ी आबादी और बड़ी अर्थव्यवस्था।
3. UN शांति सेनाओं में लगातार बड़ा योगदान।
4. परमाणु शक्ति और दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय नेतृत्व।
5. गुटनिरपेक्ष आंदोलन, WTO और जलवायु वार्ताओं में सक्रिय भूमिका।
– समर्थन: अमेरिका, रूस, फ्रांस, ब्रिटेन जैसे देशों का समर्थन, लेकिन चीन और पाकिस्तान जैसे देशों का विरोध।
निष्कर्ष:
भारत का दावा मजबूत है, परंतु सहमति बनने तक यह लक्ष्य अधूरा रहेगा।
प्रश्न 5. विश्व शांति बनाए रखने में संयुक्त राष्ट्र की सीमाओं का विश्लेषण कीजिए।
प्रस्तावना:
संयुक्त राष्ट्र ने कई संघर्षों को हल करने में योगदान दिया, लेकिन कई अवसरों पर यह असफल भी रहा।
मुख्य भाग:
– असफलताएँ:
– कोरिया और वियतनाम जैसे शीत युद्ध संघर्ष रोकने में असफल।
– वीटो शक्ति के कारण कई निर्णय अवरुद्ध हुए (जैसे अमेरिका द्वारा इज़रायल से संबंधित प्रस्तावों पर)।
– 2003 इराक युद्ध और 1999 कोसोवो संकट को रोकने में विफल।
– सीरिया और यूक्रेन संकट में सीमित सफलता।
– संरचनात्मक सीमाएँ: महाशक्तियों पर अत्यधिक निर्भरता; सीमित प्रवर्तन क्षमता।
निष्कर्ष:
संयुक्त राष्ट्र वैधता और मंच प्रदान करता है, लेकिन सुधार और अधिक प्रवर्तन शक्ति के बिना शांति स्थापना में सीमित है।
प्रश्न 6. वैश्विक शासन में संयुक्त राष्ट्र की विशेषीकृत एजेंसियों की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
प्रस्तावना:
संयुक्त राष्ट्र की विशेषीकृत एजेंसियाँ सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और मानवीय मुद्दों पर कार्य करती हैं।
मुख्य भाग:
– WHO: वैश्विक स्वास्थ्य, पोलियो उन्मूलन, COVID-19 प्रतिक्रिया।
– UNESCO: शिक्षा, धरोहर और सांस्कृतिक सहयोग।
– UNICEF: बच्चों के अधिकार, पोषण, टीकाकरण।
– ILO: श्रमिक अधिकार और मानक।
– IAEA: परमाणु ऊर्जा की निगरानी और प्रसार रोकना।
– IMF और विश्व बैंक: वित्तीय स्थिरता और विकास ऋण।
– WTO: मुक्त व्यापार और विवाद समाधान।
निष्कर्ष:
ये एजेंसियाँ शांति स्थापना के साथ‑साथ सतत विकास और वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देती हैं।
प्रश्न 7. अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और मानवाधिकार संगठनों की भूमिका पर चर्चा कीजिए।
प्रस्तावना:
राज्यों के अलावा, NGOs और मानवाधिकार संगठन भी अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में प्रभाव डालते हैं।
मुख्य भाग:
– एमनेस्टी इंटरनेशनल: राजनीतिक बंदियों और मानवाधिकार उल्लंघनों की निगरानी।
– ह्यूमन राइट्स वॉच: उल्लंघनों की जांच और सरकारों पर दबाव।
– ग्रीनपीस, ऑक्सफैम: पर्यावरण संरक्षण, गरीबी उन्मूलन और विकास।
– महत्व: आंकड़े और रिपोर्ट उपलब्ध कराना, वैश्विक जनमत बनाना, सरकारों और UN पर दबाव डालना।
निष्कर्ष:
NGOs नैतिक बल और जवाबदेही जोड़ते हैं, जिससे अंतर्राष्ट्रीय राजनीति अधिक मानवीय बनती है।
प्रश्न 8. अमेरिका-प्रभुत्व वाले एकध्रुवीय विश्व में संयुक्त राष्ट्र का महत्व स्पष्ट कीजिए।
प्रस्तावना:
1991 के बाद अमेरिका अकेला महाशक्ति बनकर उभरा।
मुख्य भाग:
– संयुक्त राष्ट्र ने खाड़ी युद्ध (1991) जैसी कार्रवाइयों को वैधता दी।
– अमेरिका ने कभी‑कभी UN को दरकिनार किया (जैसे 2003 इराक युद्ध), जिससे UN की कमजोरी सामने आई।
– फिर भी, UN छोटे देशों को मंच और आवाज़ प्रदान करता है।
– शांति स्थापना, जलवायु वार्ता और सतत विकास लक्ष्यों में UN की प्रासंगिकता बनी हुई है।
निष्कर्ष:
संयुक्त राष्ट्र अभी भी प्रासंगिक है, परंतु अमेरिका के प्रभाव को संतुलित करने के लिए सुधार आवश्यक है।
प्रश्न 9. संयुक्त राष्ट्र और लीग ऑफ नेशंस की तुलना कीजिए।
प्रस्तावना:
संयुक्त राष्ट्र ने WWII के बाद लीग ऑफ नेशंस का स्थान लिया।
मुख्य भाग:
– लीग ऑफ नेशंस (1919): अमेरिका सदस्य नहीं बना; कोई प्रवर्तन शक्ति नहीं; फासीवाद का उदय और WWII में विफल।
– संयुक्त राष्ट्र (1945): अधिक सार्वभौमिक सदस्यता, मजबूत अंग (सुरक्षा परिषद), विस्तृत कार्यक्षेत्र (मानवाधिकार, विकास, पर्यावरण)।
– उपलब्धियाँ: उपनिवेशवाद समाप्त करने में मदद, शांति स्थापना और मानवीय सहायता।
निष्कर्ष:
संयुक्त राष्ट्र ने लीग की कमजोरियों को दूर किया, लेकिन सुधार और विश्वसनीयता की चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं।
प्रश्न 10. वैश्वीकरण के युग में अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के महत्व का मूल्यांकन कीजिए।
प्रस्तावना:
वैश्वीकरण से राष्ट्र परस्पर निर्भर हो गए हैं; समस्याओं का समाधान सहयोग से ही संभव है।
मुख्य भाग:
– UN, WTO, IMF, IAEA जैसे संगठन सहयोग और विनियमन करते हैं।
– व्यापार, वित्त, पर्यावरण, आतंकवाद और महामारी जैसे मुद्दों को संबोधित करते हैं।
– नियम, मानक, विवाद समाधान और तकनीकी सहायता प्रदान करते हैं।
– आलोचना: शक्तिशाली देशों का दबदबा; निर्णय प्रक्रिया में असमानता।
निष्कर्ष:
कमियों के बावजूद अंतर्राष्ट्रीय संगठन वैश्वीकरण के प्रबंधन और सामूहिक सुरक्षा व विकास सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हैं।