अध्याय 5: समकालीन विश्व में सुरक्षा
सारांश (हिंदी)
- सुरक्षा का अर्थ
– सुरक्षा का मतलब है—सार्वभौमिकता, स्वतंत्रता, क्षेत्रीय अखंडता और मानव जीवन/गरिमा को ऐसे खतरों से मुक्त रखना जो अपूरणीय क्षति पहुँचा दें।
– सुरक्षा की दो प्रमुख अवधारणाएँ हैं: परंपरागत (Traditional) और गैर‑परंपरागत (Non‑traditional)।2. परंपरागत सुरक्षा की अवधारणा
a) बाह्य (External):
– मुख्य खतरा अन्य राज्यों की सैन्य शक्ति से माना जाता है जो संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता को चुनौती देता है।
– रणनीतियाँ: (1) प्रतिरोध/निवारण (Deterrence) (2) रक्षा (Defence) (3) शक्ति‑संतुलन (Balance of Power) (4) सैन्य गठबंधन (जैसे NATO, वारसा संधि) ।
b) आंतरिक (Internal):
– राज्य के भीतर स्थिरता, अलगाववाद, जातीय/क्षेत्रीय विद्रोह, गृहयुद्ध, तख्तापलट आदि से निपटना।
c) सहयोग के साधन (Traditional Cooperation):
– निरस्त्रीकरण (Disarmament): जैविक व रासायनिक हथियार प्रतिबंध जैसी संधियाँ।
– शस्त्र नियंत्रण (Arms Control): SALT, START, NPT आदि के माध्यम से हथियारों की संख्या/तैनाती पर नियंत्रण।
– विश्वास निर्माण उपाय (CBMs): सैन्य जानकारी साझा करना, हॉटलाइन, निरीक्षण आदि।3. गैर‑परंपरागत सुरक्षा
– सुरक्षा का संदर्भ केवल राज्य नहीं, “व्यक्ति” और “मानवता” भी है।
– मानव सुरक्षा (Human Security):
• संकीर्ण दृष्टि: हिंसा/आतंक, संघर्ष से सुरक्षा।
• व्यापक दृष्टि: भूख, बीमारी, प्राकृतिक आपदा, गरीबी, बेरोज़गारी से सुरक्षा।
– वैश्विक सुरक्षा (Global Security): ऐसे मुद्दे जिनका प्रभाव सीमाओं से परे है—आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन, महामारियाँ, पलायन/प्रवासन, साइबर खतरे।
– प्रमुख नए खतरे: आतंकवाद, मानवाधिकार उल्लंघन, उत्तर‑दक्षिण असमानता/गरीबी, शरणार्थी संकट, HIV‑AIDS/कोविड जैसी महामारियाँ, पर्यावरणीय क्षरण/वैश्विक ऊष्मीकरण।4. सहकारी सुरक्षा (Cooperative Security)
– गैर‑परंपरागत खतरों का समाधान सैन्य बल से अधिक “सहयोग” से होता है—द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर।
– इसमें UN, WHO, IMF/विश्व बैंक, क्षेत्रीय संगठन, NGOs, निजी क्षेत्र और नागरिक समाज की भागीदारी होती है।
– बल प्रयोग अंतिम उपाय होना चाहिए और सामूहिक वैधता/मंडेट के साथ।5. भारत की सुरक्षा रणनीति
1) सैन्य क्षमता का सुदृढ़ीकरण: पाकिस्तान (1947, 1965, 1971, 1999) व चीन (1962) के साथ संघर्ष; 1974 व 1998 में परमाणु परीक्षण; सीमाओं की सुरक्षा व आधुनिकीकरण।
2) अंतरराष्ट्रीय सहयोग व मानदंड: UN, गुटनिरपेक्षता, निरस्त्रीकरण, जलवायु समझौते, शांति अभियानों में सक्रिय योगदान।
3) आंतरिक एकता व लोकतंत्र: बहुल समाज के लिए संवैधानिक‑लोकतांत्रिक ढाँचा; अलगाववादी हिंसा/उग्रवाद से निपटना; क़ानून के शासन को मज़बूत करना।
4) समावेशी विकास: गरीबी‑असमानता कम कर आर्थिक‑सामाजिक न्याय; सीमा/सीमान्त क्षेत्रों का विकास।6. निष्कर्ष/मुख्य बिंदु
– परंपरागत सुरक्षा राज्य‑केंद्रित व सैन्य आयामों पर आधारित है; गैर‑परंपरागत सुरक्षा मानव‑केंद्रित व वैश्विक सरोकारों पर।
– आज की सुरक्षा “समग्र और सहकारी” है—जलवायु, महामारी, आतंकवाद, प्रवासन जैसी चुनौतियाँ साझे प्रयास से ही सुलझेंगी।
– लोकतांत्रिक शासन, क्षेत्रीय सहयोग और वैश्विक बहुपक्षवाद टिकाऊ शांति व विकास की शर्तें हैं।