अध्याय 7: वैश्वीकरण
सारांश (हिंदी)
- वैश्वीकरण का अर्थ
– वैश्वीकरण देशों के बीच आर्थिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और तकनीकी क्षेत्रों में बढ़ती परस्पर‑निर्भरता की प्रक्रिया है।
– इसमें वस्तुओं, सेवाओं, पूँजी, विचारों और लोगों का सीमाओं के पार प्रवाह शामिल है।
– इससे दुनिया ‘सिकुड़ती’ नज़र आती है और राष्ट्रीय सीमाएँ कुछ मामलों में कम महत्वपूर्ण हो जाती हैं।2. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
– वैश्वीकरण नया नहीं है; इसकी शुरुआत प्राचीन व्यापार मार्गों और उपनिवेशवाद से हुई।
– आधुनिक रूप द्वितीय विश्व युद्ध के बाद IMF, विश्व बैंक और GATT (अब WTO) की स्थापना से प्रारंभ हुआ।
– 1990 के दशक में उदारीकरण, निजीकरण और डिजिटल तकनीक के कारण यह तीव्र हुआ।3. आर्थिक आयाम
– वैश्वीकरण से राष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाएँ व्यापार, निवेश और संचार के माध्यम से जुड़ गईं।
– भारत ने 1991 में आर्थिक उदारीकरण अपनाया और विदेशी व्यापार व पूँजी के लिए बाज़ार खोले।
– लाभ: आर्थिक वृद्धि, नई तकनीक, रोज़गार सृजन।
– चुनौतियाँ: असमानता, बेरोज़गारी, विदेशी निर्भरता।4. राजनीतिक आयाम
– वैश्वीकरण राज्य की संप्रभुता को चुनौती देता है और देशों को परस्पर निर्भर बनाता है।
– अंतरराष्ट्रीय संगठन, बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ और NGO अब अधिक प्रभावशाली हो गए हैं।
– आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन और महामारियों जैसे मुद्दों पर राज्यों को सहयोग करना पड़ता है।5. सांस्कृतिक आयाम
– वैश्वीकरण ने विचारों, जीवन‑शैली, भोजन, मीडिया और फैशन का वैश्विक प्रसार बढ़ाया।
– इससे सांस्कृतिक समानता (Cultural Homogenisation) बढ़ी – पश्चिमी संस्कृति का प्रभाव।
– साथ ही सांस्कृतिक मिश्रण (Cultural Hybridisation) भी हुआ – स्थानीय और वैश्विक संस्कृति का मेल।6. भारत पर वैश्वीकरण का प्रभाव
– सकारात्मक प्रभाव: आर्थिक वृद्धि, रोजगार, सूचना‑प्रौद्योगिकी क्षेत्र का विकास, बेहतर संचार।
– नकारात्मक प्रभाव: ग्रामीण‑शहरी असमानता, छोटे उत्पादकों की हानि, सांस्कृतिक पश्चिमीकरण।
– भारत ने परंपरा और आधुनिकता को मिलाकर अनुकूलन का मार्ग अपनाया।7. वैश्वीकरण का विरोध और प्रतिरोध आंदोलन
– कई समूह वैश्वीकरण के असमान प्रभावों का विरोध करते हैं।
– उदाहरण: विश्व सामाजिक मंच (World Social Forum), WTO विरोधी आंदोलन।
– ये आंदोलन न्यायपूर्ण व्यापार, मानवाधिकार और पर्यावरण संरक्षण की माँग करते हैं।8. भारत की नीति
– भारत WTO, IMF और UN जैसे संस्थानों में सक्रिय भूमिका निभाता है।
– मुक्त व्यापार का समर्थन करते हुए कृषि और तकनीकी क्षेत्रों की रक्षा करता है।
– विकासशील देशों के हित में न्यायपूर्ण वैश्विक व्यवस्था की वकालत करता है।9. प्रमुख शब्द
– उदारीकरण (Liberalisation): सरकारी प्रतिबंधों को कम करना।
– निजीकरण (Privatisation): सरकारी उपक्रमों को निजी क्षेत्र में देना।
– वैश्विक गाँव (Global Village): संचार के माध्यम से जुड़ी दुनिया।
– सांस्कृतिक समानता (Cultural Homogenisation): एकरूप संस्कृति।
– सांस्कृतिक मिश्रण (Cultural Hybridisation): स्थानीय‑वैश्विक संस्कृति का मेल।10. निष्कर्ष
– वैश्वीकरण एक मिश्रित प्रक्रिया है जिसमें अवसर भी हैं और चुनौतियाँ भी।
– यह अर्थव्यवस्थाओं और संस्कृतियों को जोड़ता है पर असमानता भी बढ़ाता है।
– लक्ष्य यह होना चाहिए कि वैश्वीकरण समावेशी, न्यायसंगत और टिकाऊ बने।