1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
प्राचीन एवं सांस्कृतिक संबंध: भारत और भूटान के बीच बौद्ध धर्म पर आधारित गहरे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंध हैं। भूटान महायान बौद्ध धर्म का पालन करता है, जिसकी जड़ें भारतीय मठों और नालंदा परंपरा से जुड़ी हैं। तीर्थयात्रा, पर्व-त्योहारों और मठों के आदान-प्रदान ने हमेशा संबंधों को मजबूत किया है।
1949 की मित्रता संधि: भारत की स्वतंत्रता के बाद भारत और भूटान के बीच स्थायी शांति और मित्रता संधि (1949) हुई। मुख्य प्रावधान: भूटान बाहरी मामलों में भारत की सलाह लेगा; भारत भूटान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगा।
2007 संधि संशोधन: इस संधि को संशोधित कर भूटान को विदेश नीति में अधिक स्वायत्तता दी गई, हालाँकि भारत और भूटान के बीच सुरक्षा, आर्थिक विकास और सांस्कृतिक सहयोग बना रहा।
2. प्रमुख विवाद
भारत और भूटान के बीच कोई द्विपक्षीय विवाद नहीं है। मुख्य चिंता चीन के भूटान पर क्षेत्रीय दावों की है, जो अप्रत्यक्ष रूप से भारत की सुरक्षा को प्रभावित करते हैं।
डोकलाम गतिरोध (2017): चीन ने भूटान के क्षेत्र में सड़क बनाने का प्रयास किया, जो भारत–चीन–भूटान त्रि-जंक्शन के पास था। भारत ने इसका विरोध किया क्योंकि यह सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के लिए सुरक्षा खतरा था, जो भारत के पूर्वोत्तर को शेष भारत से जोड़ने वाली संकरी पट्टी है।
3. सहयोग के क्षेत्र
आर्थिक सहयोग: भारत भूटान का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जो पारगमन, वित्तीय सहायता और निवेश प्रदान करता है।
जलविद्युत सहयोग: भारत ने चुखा, ताला, कुरिचू और मंगदेछु जैसी परियोजनाएँ विकसित करने में मदद की। भूटान अतिरिक्त बिजली भारत को बेचता है, जिससे जलविद्युत उसकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।
रक्षा एवं सुरक्षा: भारतीय सैन्य प्रशिक्षण दल (IMTRAT) भूटान में तैनात है। भारत भूटानी सेना को प्रशिक्षण और उपकरण उपलब्ध कराता है।
संपर्क: असम, पश्चिम बंगाल और सिक्किम से भूटान तक सड़क और रेल मार्ग; मोतिहारी–अमलेखगंज पेट्रोलियम पाइपलाइन।
सांस्कृतिक एवं शैक्षिक संबंध: भूटानी छात्रों के लिए छात्रवृत्ति; सांस्कृतिक, धार्मिक और भाषाई आदान-प्रदान।
4. वर्तमान स्थिति (2017–2024)
भारत–भूटान संबंध सौहार्दपूर्ण और विवाद-मुक्त बने हुए हैं। भारत भूटान का सबसे बड़ा विकास सहयोगी है। जलविद्युत, शिक्षा और सड़क परियोजनाओं में भारत का सहयोग निरंतर जारी है।
भूटान को उत्तरी सीमा पर चीन के अतिक्रमण की चिंता है, और भारत ने उसे पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया है।
दोनों देशों के नेताओं के बीच उच्च-स्तरीय यात्राएँ लगातार होती रही हैं। 2023–24 में भूटान और चीन ने सीमा वार्ता को आगे बढ़ाया, जिस पर भारत बारीकी से नजर रख रहा है।
5. चुनौतियाँ
चीन का प्रभाव: चीन के भूटान पर क्षेत्रीय दावे भारत की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय हैं।
आर्थिक निर्भरता: भूटान व्यापार और जलविद्युत राजस्व के लिए भारत पर अत्यधिक निर्भर है।
युवा पलायन: कई भूटानी युवा विदेश में अवसर तलाशते हैं, जिससे द्विपक्षीय सहभागिता प्रभावित होती है।
6. आगे की राह
जलविद्युत से परे आर्थिक विविधीकरण को बढ़ावा देना।
सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना ताकि चीन के प्रभाव को संतुलित किया जा सके।
पर्यटन, सूचना प्रौद्योगिकी और शिक्षा में सहयोग बढ़ाना।
सांस्कृतिक और शैक्षिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करना।
नियमित उच्च-स्तरीय संवाद बनाए रखना ताकि आपसी विश्वास कायम रहे।