भारत–म्यांमार संबंध (Hindi)
1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
प्राचीन संबंध: भारत और म्यांमार के बीच सदियों से सांस्कृतिक, धार्मिक और व्यापारिक संबंध रहे हैं। तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में सम्राट अशोक के शासनकाल में बौद्ध धर्म म्यांमार पहुँचा, जिससे गहरे आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंध बने जो आज भी कायम हैं।
औपनिवेशिक काल: म्यांमार 1937 तक ब्रिटिश भारत का हिस्सा था, उसके बाद यह एक अलग उपनिवेश बना। इस दौरान बड़ी संख्या में भारतीय मजदूर वहाँ गए। म्यांमार ने 1948 में स्वतंत्रता प्राप्त की।
स्वतंत्रता के बाद: भारत और म्यांमार ने 1948 में राजनयिक संबंध स्थापित किए। प्रारंभिक संबंध सौहार्दपूर्ण रहे, लेकिन म्यांमार में लंबे सैन्य शासन के कारण कई बार तनाव भी उत्पन्न हुआ। फिर भी भौगोलिक और सांस्कृतिक निकटता ने संबंधों को हमेशा महत्वपूर्ण बनाए रखा।
2. प्रमुख विवाद
सीमा विवाद: भारत और म्यांमार की 1,643 किमी लंबी सीमा है, जो अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम से लगती है। यह सीमा छिद्रयुक्त है, जिससे तस्करी, अवैध प्रवासन और सीमा-पार विद्रोह जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।
विद्रोह: भारत के पूर्वोत्तर के कई उग्रवादी समूह म्यांमार की भूमि का उपयोग अपने ठिकानों के रूप में करते रहे हैं। भारत और म्यांमार ने संयुक्त अभियान चलाकर इन्हें समाप्त करने का प्रयास किया है।
रोहिंग्या समस्या: म्यांमार की रोहिंग्या शरणार्थी समस्या भारत तक फैल गई है। इससे मानवीय और सुरक्षा दोनों तरह की चुनौतियाँ सामने आई हैं। भारत को राहत देने के साथ-साथ घरेलू सुरक्षा चिंताओं से भी निपटना पड़ता है।
3. सहयोग के क्षेत्र
व्यापार और अर्थव्यवस्था: म्यांमार भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ के तहत दक्षिण-पूर्व एशिया का द्वार है। भारत म्यांमार के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में से है और ऊर्जा व अवसंरचना क्षेत्रों में निवेश करता है।
संपर्क: प्रमुख परियोजनाओं में कालादान मल्टी-मोडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट परियोजना शामिल है, जो भारत के पूर्वोत्तर को बंगाल की खाड़ी से जोड़ती है, और भारत–म्यांमार–थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग, जो क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा देगा।
सुरक्षा: दोनों देश विद्रोह-विरोधी अभियानों और खुफिया जानकारी साझा करने में सहयोग करते हैं।
ऊर्जा: भारत म्यांमार के तेल, गैस और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में निवेश करता है।
सांस्कृतिक संबंध: बौद्ध धर्म और साझा त्योहार दोनों देशों के बीच मजबूत सांस्कृतिक कड़ी हैं। जन-संपर्क आदान-प्रदान से आपसी सद्भावना और बढ़ती है।
4. वर्तमान स्थिति (2015–2024)
भारत अपनी ‘एक्ट ईस्ट’ और ‘पड़ोस पहले’ नीतियों के तहत म्यांमार के साथ सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ है। हालाँकि बुनियादी ढाँचे और संपर्क परियोजनाओं में देरी होती रही है, फिर भी वे संबंधों का मुख्य आधार हैं।
2021 के सैन्य तख्तापलट ने संबंधों को जटिल बना दिया। भारत ने लोकतंत्र के समर्थन और सुरक्षा आवश्यकताओं के बीच संतुलन साधने की कोशिश की है।
म्यांमार में चीन का बढ़ता प्रभाव—बंदरगाह, पाइपलाइन और सैन्य सहयोग—भारत के लिए सामरिक चुनौती है। इसके बावजूद भारत व्यापार, ऊर्जा और संपर्क क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहा है।
5. चुनौतियाँ
- रोहिंग्या शरणार्थी संकट और उससे जुड़ी सुरक्षा समस्याएँ।
• म्यांमार में चीन का सामरिक प्रभुत्व।
• कालादान परियोजना और त्रिपक्षीय राजमार्ग जैसी बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं में देरी।
• सीमा-पार विद्रोह और मादक पदार्थों की तस्करी।
6. आगे की राह
- बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं को तेज़ी से पूरा कर भारत के पूर्वोत्तर को दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ना।
• विद्रोह-विरोधी सहयोग और संयुक्त सीमा प्रबंधन को मजबूत करना।
• चीन के प्रभाव का संतुलन करने के लिए विश्वसनीय निवेश और विकास विकल्प उपलब्ध कराना।
• मानवीय सहायता बढ़ाना और लोकतांत्रिक मूल्यों को प्रोत्साहित करना।
• BIMSTEC और ASEAN जैसे क्षेत्रीय मंचों के माध्यम से सामरिक और आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देना।