भारत–श्रीलंका संबंध
1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
प्राचीन संबंध: तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में सम्राट अशोक ने अपने पुत्र महिंद और पुत्री संघमित्त को श्रीलंका भेजा, जिन्होंने वहाँ बौद्ध धर्म का प्रचार किया। इससे दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक और धार्मिक संबंध स्थापित हुए, जो आज भी कायम हैं। साझा भाषाई और व्यापारिक संबंधों ने भी निकटता को बढ़ाया।
औपनिवेशिक काल: ब्रिटिश शासन के दौरान, 19वीं और 20वीं शताब्दी में भारतीय तमिलों को बागान मजदूर के रूप में श्रीलंका भेजा गया। इससे श्रीलंका में एक बड़ा तमिल समुदाय बस गया, जो बाद में राजनीतिक विवाद का कारण बना।
स्वतंत्रता के बाद: श्रीलंका ने 1948 में स्वतंत्रता प्राप्त की और भारत ने तुरंत राजनयिक संबंध स्थापित किए। प्रारंभिक दशकों में व्यापार, संस्कृति और क्षेत्रीय राजनीति में सहयोग के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बने रहे।
2. प्रमुख विवाद
जातीय समस्या: 1983 से 2009 तक श्रीलंका में तमिल टाइगर्स (LTTE) और श्रीलंकाई राज्य के बीच भीषण गृहयुद्ध हुआ। भारत सीधे तौर पर शामिल हुआ, विशेषकर 1987 के भारत–श्रीलंका समझौते के बाद, जिसका उद्देश्य तमिलों को स्वायत्तता देना था। भारत ने भारतीय शांति सेना (IPKF) भी भेजी, जिसे मिश्रित परिणाम मिले और विरोध का सामना करना पड़ा।
मछुआरों का विवाद: पाक जलडमरूमध्य और कच्चथीवू द्वीप विवादास्पद क्षेत्र बने हुए हैं। भारतीय मछुआरों की गिरफ्तारी अक्सर होती है, जिससे विशेषकर तमिलनाडु में तनाव बढ़ता है।
कच्चथीवू द्वीप: 1974 के द्विपक्षीय समझौते के तहत यह द्वीप श्रीलंका को सौंपा गया, लेकिन भारतीय मछुआरे अब भी पारंपरिक अधिकार का दावा करते हैं। यह विवाद आज भी राजनीतिक रूप से संवेदनशील है।
3. सहयोग के क्षेत्र
व्यापार और अर्थव्यवस्था: भारत श्रीलंका का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। 1998 का भारत–श्रीलंका मुक्त व्यापार समझौता (FTA) ने वाणिज्य को बढ़ावा दिया और भारत को श्रीलंका के प्रमुख निर्यात गंतव्यों में से एक बनाया।
विकास सहयोग: भारत ने बड़े ऋण और सहायता के माध्यम से आवास, रेलवे, बंदरगाह और सांस्कृतिक केंद्र जैसी परियोजनाओं में सहयोग दिया है।
सुरक्षा और रक्षा: दोनों देश संयुक्त नौसैनिक अभ्यास करते हैं और आतंकवाद के खिलाफ खुफिया जानकारी साझा करते हैं। भारतीय महासागर में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहयोग किया जाता है।
सांस्कृतिक संबंध: साझा बौद्ध धरोहर और रामायण ट्रेल सांस्कृतिक कूटनीति को मजबूत करते हैं। भारत श्रीलंका में सांस्कृतिक स्थलों के पुनर्निर्माण में भी सहयोग करता है।
मानवीय सहयोग: भारत ने संकट के समय सहायता दी है, जैसे 2004 की सुनामी और 2022 के आर्थिक संकट के दौरान ईंधन, भोजन और दवाइयाँ भेजीं।
4. वर्तमान स्थिति (2015–2024)
भारत ने 2022 के आर्थिक संकट के दौरान श्रीलंका को लगभग 4 अरब डॉलर की सहायता दी, जिसमें ईंधन, भोजन और दवाइयाँ शामिल थीं। नवीकरणीय ऊर्जा सहयोग का विस्तार हो रहा है, विशेषकर त्रिंकोमाली, सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं में।
भारत की SAGAR (Security and Growth for All in the Region) नीति श्रीलंका की भारतीय महासागर में सामरिक भूमिका से मेल खाती है। हालाँकि चीन की बेल्ट एंड रोड पहल (BRI) के तहत हम्बनटोटा बंदरगाह (99 वर्षों के लिए चीन को पट्टे पर) और कोलंबो पोर्ट सिटी जैसी परियोजनाएँ भारत के लिए सामरिक चुनौती प्रस्तुत करती हैं।
5. चुनौतियाँ
- पाक जलडमरूमध्य और कच्चथीवू द्वीप के आसपास मछुआरों का विवाद।
• श्रीलंका में चीन की बढ़ती सामरिक उपस्थिति।
• घरेलू तमिल मुद्दा और तमिलनाडु की राजनीतिक संवेदनशीलता।
• व्यापार असंतुलन की समस्या।
6. आगे की राह
- मछुआरों के विवाद को सहयोगी ढाँचे और संयुक्त प्रबंधन से हल करना।
• व्यापार संतुलन हेतु श्रीलंकाई वस्तुओं को अधिक बाजार पहुँच देना।
• नवीकरणीय ऊर्जा और अवसंरचना संपर्क परियोजनाओं का विस्तार करना।
• सांस्कृतिक कूटनीति को बौद्ध पर्यटन और रामायण सर्किट के माध्यम से मजबूत करना।
• चीन के प्रभाव का संतुलन करने के लिए विश्वसनीय विकल्प प्रदान करना और श्रीलंका की संप्रभुता का सम्मान करना।