Course Content
Geography
The Class 12 Geography Paper Solution (SS-14, 2025) provides complete, structured, and easy-to-understand answers for every question asked in the RBSE Senior Secondary Examination. This solution includes Section-wise explanations, MCQ answers with reasoning, fill-in-the-blanks, very short answers, short answers, and long essay-type questions, all presented in clear, exam-oriented language. Students will find detailed explanations on key Geography topics such as Human Geography, Population Distribution, Human Development, Agriculture, Manufacturing Industries, Transport and Communication, Trade, Resource Management, and Environmental Issues. Each section is written to match the exact question pattern of the official board exam. This solved paper helps students improve conceptual clarity, learn answer-writing techniques, and prepare effectively for board examinations. It is ideal for revision, last-minute preparation, and self-study. All answers follow updated RBSE guidelines, ensuring accuracy and high scoring potential.
0/12
Previous Year Paper – Class 12 RBSE 2025

 


🇮🇳 ⭐ SECTION C — दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Hindi, ~100 शब्द)


14) आसियान (ASEAN) की उपलब्धियों का संक्षिप्त विवरण दीजिए और इसकी प्रासंगिकता पर अपनी राय व्यक्त कीजिए।

उत्तर (~100 शब्द):

आसियान की स्थापना 1967 में क्षेत्रीय शांति, सहयोग और विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हुई। इस संगठन ने सदस्य देशों के बीच राजनीतिक तनाव को कम किया और आर्थिक एकीकरण को मजबूत किया। आसियान क्षेत्रीय मंच (ARF) के माध्यम से सुरक्षा संवाद को बढ़ावा देता है। मुक्त व्यापार समझौतों ने व्यापार और निवेश में वृद्धि की है। संस्कृति, शिक्षा और आपदा प्रबंधन में भी सहयोग बढ़ा है। आज के वैश्विक युग में आसियान अत्यंत प्रासंगिक है क्योंकि यह एशिया–प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता प्रदान करता है और चीन–अमेरिका जैसे महाशक्तियों के बीच संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


वैकल्पिक प्रश्न (OR)

चीन ने अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए क्या प्रयास किए?

उत्तर (~100 शब्द):

चीन ने 1978 में देंग शियाओपिंग के नेतृत्व में आर्थिक सुधार शुरू किए। उसने बंद समाजवादी मॉडल से हटकर बाज़ार आधारित आर्थिक नीति अपनाई। विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) बनाए गए। कृषि में सुधार कर उत्पादन बढ़ाया गया और उद्योगों को आधुनिक तकनीक से मजबूत किया गया। चीन ने निर्यात–आधारित विकास पर बल दिया और बड़े पैमाने पर बुनियादी ढाँचे में निवेश किया। इन सुधारों से चीन “विश्व की फ़ैक्ट्री” बना और तेज़ी से आर्थिक शक्ति बना। आज चीन विश्व अर्थव्यवस्था और व्यापार में प्रमुख भूमिका निभाता है।


15) वैश्विक स्तर पर पर्यावरण की चिंता करना आवश्यक क्यों है?

उत्तर (~100 शब्द):

पर्यावरण समस्याएँ—जैसे जलवायु परिवर्तन, वैश्विक तापन, ओज़ोन परत में छिद्र, वनों की कटाई और प्रदूषण—सभी देशों को प्रभावित करती हैं। इनका समाधान एक देश अकेले नहीं कर सकता। तापमान बढ़ने से समुद्र स्तर बढ़ता है, वर्षा चक्र बदलता है और खाद्य सुरक्षा खतरे में पड़ती है। प्रदूषण एक क्षेत्र से दूसरे देशों में फैल जाता है। जैव विविधता का नुकसान पारिस्थितिकी तंत्र को असंतुलित करता है। इसलिए वैश्विक सहयोग, अंतरराष्ट्रीय संधियाँ और सतत विकास की नीतियाँ आवश्यक हैं ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए पृथ्वी को सुरक्षित रखा जा सके।


वैकल्पिक प्रश्न (OR)

‘क्योटो प्रोटोकॉल’ के अंतर्गत शामिल मुख्य मुद्दों की व्याख्या कीजिए।

उत्तर (~100 शब्द):

क्योटो प्रोटोकॉल (1997) एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है जिसका उद्देश्य ग्रीनहाउस गैसों को कम करके वैश्विक तापन को नियंत्रित करना है। इसमें विकसित देशों को कानूनी रूप से उत्सर्जन घटाने के लिए बाध्य किया गया क्योंकि वे ऐतिहासिक प्रदूषण के लिए अधिक जिम्मेदार हैं। CO₂, CH₄ और N₂O प्रमुख गैसें मानी गईं। इसमें क्लीन डेवलपमेंट मैकेनिज़्म (CDM), कार्बन ट्रेडिंग और संयुक्त कार्यान्वयन जैसे उपाय शामिल किए गए। विकासशील देशों पर अनिवार्य लक्ष्य नहीं लगाए गए लेकिन उन्हें सतत विकास के लिए प्रोत्साहित किया गया। यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण वैश्विक कदम था।


16) वैश्वीकरण के तीन आर्थिक प्रभाव लिखिए।

उत्तर (~100 शब्द):

वैश्वीकरण से देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं और पूँजी का प्रवाह बढ़ा, जिससे व्यापार और आर्थिक विकास तेज हुआ। बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने विकासशील देशों में निवेश किया, जिससे रोजगार और तकनीकी विकास में वृद्धि हुई। प्रतिस्पर्धा बढ़ने से उत्पादों की गुणवत्ता सुधरी और कीमतें घटीं। लेकिन लाभ समान रूप से नहीं मिले, जिससे आय असमानता बढ़ी। वैश्वीकरण ने अर्थव्यवस्थाओं को एक-दूसरे पर निर्भर बना दिया, जिससे एक देश की आर्थिक समस्या दूसरे देशों को भी प्रभावित करती है। कुल मिलाकर, यह विकास का अवसर और जोखिम दोनों लेकर आया।


वैकल्पिक प्रश्न (OR)

वैश्वीकरण के सांस्कृतिक प्रभावों की व्याख्या कीजिए।

उत्तर (~100 शब्द):

वैश्वीकरण से विभिन्न देशों की संस्कृतियों का आदान–प्रदान बढ़ा। भोजन, फैशन, संगीत, फ़िल्में और जीवनशैली वैश्विक स्तर पर फैलने लगीं। इससे दुनिया अधिक जुड़ी और विविध बनी। लोकतंत्र, मानवाधिकार और लैंगिक समानता जैसे मूल्यों का प्रसार भी तेज हुआ। लेकिन इससे सांस्कृतिक एकरूपता (Homogenization) का खतरा भी पैदा हुआ, जिसमें स्थानीय परंपराएँ, भाषाएँ और रीति–रिवाज़ कमजोर हो सकते हैं। युवा पीढ़ी वैश्विक संस्कृति अपनाने लगती है, जिससे पारंपरिक पहचान प्रभावित हो सकती है। फिर भी, यह संवाद, समझ और सह-अस्तित्व बढ़ाने में सहायक है।


17) भारत–चीन संबंधों पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

उत्तर (~100 शब्द):

भारत–चीन संबंध सहयोग और संघर्ष दोनों का मिश्रण हैं। दोनों प्राचीन सभ्यताएँ और उभरती वैश्विक शक्तियाँ हैं। व्यापार, BRICS और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) में दोनों सहयोग करते हैं। लेकिन सीमा विवाद, विशेष रूप से 1962 का युद्ध और अक्साई चिन व अरुणाचल प्रदेश मुद्दे, संबंधों में तनाव लाते हैं। दोनों देशों में व्यापार बढ़ा है, पर भारत का व्यापार घाटा भारी है। सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए कई संवाद तंत्र मौजूद हैं, फिर भी परस्पर अविश्वास बना हुआ है। संबंध आर्थिक सहयोग और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलन पर आधारित हैं।


वैकल्पिक प्रश्न (OR)

भारत की परमाणु नीति पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

उत्तर (~100 शब्द):

भारत की परमाणु नीति शांतिपूर्ण उपयोग और न्यूनतम प्रतिरोधक क्षमता (Minimum Credible Deterrence) पर आधारित है। भारत पहले प्रयोग न करने (No First Use) की नीति अपनाता है—यानी भारत पहले परमाणु हथियार का प्रयोग नहीं करेगा। 1974 और 1998 के परमाणु परीक्षणों ने भारत की सुरक्षा क्षमता को मजबूत किया। भारत वैश्विक निरस्त्रीकरण का समर्थक है, पर NPT और CTBT जैसे संधियों को असमान मानकर स्वीकार नहीं करता। भारत जिम्मेदार परमाणु व्यवहार पर जोर देता है और परमाणु हथियारों को आतंकवादियों या अस्थिर देशों के हाथों में जाने से रोकने की आवश्यकता पर बल देता है।