Course Content
Theme 1: Bricks, Beads and Bones
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Theme 2 : Kings, Farmers, and Towns: Early States and Economies
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Theme 3 : Kinship, Caste and Class
🧩 Theme 3 – Kinship, Caste and Class (Early Societies, c. 600 BCE – 600 CE) This chapter explores social structures of early Indian society — how families, kinship systems, marriage customs, caste, and class hierarchies evolved over time. It examines what ancient texts like the Mahabharata, Dharmasutras, Dharmashastras, and other Vedic literature reveal about everyday life, social norms, and values.
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Themes in Indian History

विषय का सारांश

यह अध्याय हड़प्पा सभ्यता के पतन के बाद भारत में प्रारंभिक राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक प्रणालियों के विकास की चर्चा करता है (लगभग ई.पू. 1500 से ई. 600 तक)। इसमें बताया गया है कि कैसे राज्य, नगर, कृषि, व्यापार और प्रशासन विकसित हुए तथा अभिलेखों और पुरातत्व की सहायता से इतिहासकारों ने भारत के प्रारंभिक इतिहास का पुनर्निर्माण किया।

1. स्रोत और खोजें

  • अभिलेख विद्या (Epigraphy) और मुद्राशास्त्र (Numismatics) प्रारंभिक भारत को समझने के मुख्य स्रोत हैं।
  • 1830 के दशक में जेम्स प्रिन्सेप ने ब्राह्मी और खरोष्ठी लिपियों को पढ़ा और पियदस्सी नाम से जाने जाने वाले राजा की पहचान अशोक के रूप में की।
  • इससे प्रारंभिक राजवंशों और राजनीतिक इतिहास के पुनर्निर्माण में सहायता मिली।

2. सोलह महाजनपद

  • लगभग छठी शताब्दी ई.पू. में भारत में 16 शक्तिशाली राज्यों का उदय हुआ, जिन्हें महाजनपद कहा गया — जैसे मगध, कोसल, कुरु, पांचाल, वज्जि, अवंती आदि।
  • कुछ राजतंत्र थे तो कुछ गणतंत्र (गण या संघ) के रूप में शासित थे।
  • प्रत्येक की राजधानी किलेबंद थी, उनके पास सेनाएँ और कर वसूली की व्यवस्था थी।
  • मगध सबसे शक्तिशाली बना क्योंकि वहाँ की भूमि उपजाऊ थी, झारखंड के लौह भंडार उपलब्ध थे, हाथी युद्ध में काम आते थे और बिंबिसार, अजातशत्रु, नंद जैसे प्रभावशाली शासक हुए।

3. मौर्य साम्राज्य (ई.पू. 321–185)

  • चंद्रगुप्त मौर्य ने साम्राज्य की स्थापना की, जो अफगानिस्तान और बलूचिस्तान तक फैला।
  • उसके पौत्र अशोक ने कलिंग पर विजय प्राप्त की और शिलालेखों के माध्यम से अपने आदेश अंकित करवाए।
  • स्रोत: पुरातत्व, अर्थशास्त्र (कौटिल्य), इंडिका (मेगस्थनीज), बौद्ध और जैन ग्रंथ।

प्रशासन: – प्रमुख केन्द्र: पाटलिपुत्र, तक्षशिला, उज्जयिनी, तोसली, सुवर्णगिरी
– अधिकारी सेना, सिंचाई और कर व्यवस्था संभालते थे।
धम्म महामात्र अशोक के नैतिक नीति (धम्म) का प्रचार करते थे।
– शासन सबसे सशक्त राजधानी और प्रांतीय केन्द्रों में था।

4. मौर्योत्तर राज्य और राजसत्ता की धारणाएँ

दक्षिण के जनपद:चोल, चेर और पांड्य जनपदों में शासक कर के स्थान पर उपहार (नजराना) लेते थे।
– इनका उल्लेख तमिल संगम साहित्य में मिलता है।

दैवी राजसत्ता:कुषाण (ई.पू. 1वीं – ई. 1वीं शताब्दी) शासक स्वयं को देवपुत्र (ईश्वर का पुत्र) कहते थे।
गुप्त साम्राज्य (चौथी–छठी शताब्दी) ने साम्राज्य परंपरा को पुनर्जीवित किया। समुद्रगुप्त की प्रयाग प्रशस्ति में उन्हें देवतुल्य बताया गया है।

5. बदलता ग्रामीण जीवन

  • कृषि विस्तार लोहे के हल, धान की रोपाई और सिंचाई (तालाब, कुएँ, नहरें) से हुआ।
  • इससे उत्पादन बढ़ा लेकिन सामाजिक असमानता भी बढ़ी — बड़े भूस्वामी (गृहपति), छोटे किसान और भूमिहीन मजदूर।
  • भूमि अनुदान आम हो गए — जिन्हें ताम्रपत्रों पर दर्ज किया गया।
  • उदाहरण: प्रभावती गुप्ता का ताम्रपत्र दर्शाता है कि राजकन्याएँ भी भूमि की स्वामिनी हो सकती थीं।
  • भूमि दान ने कृषि विस्तार को बढ़ावा दिया लेकिन राजसत्ता को कमजोर किया और नए ग्रामीण अभिजात वर्ग को जन्म दिया।

6. नगर और व्यापार

शहरी केन्द्र: – प्रमुख नगर: पाटलिपुत्र, उज्जयिनी, मथुरा, पुहार
– पुरातत्व से कला-कौशल और नॉर्दर्न ब्लैक पॉलिश्ड वेयर मिट्टी के बर्तनों के प्रमाण मिले हैं।

व्यापार मार्ग: – व्यापारिक मार्ग भारत को मध्य एशिया, रोम, पश्चिम एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ते थे।
– निर्यात: मसाले, वस्त्र, हाथीदांत, रत्न
– आयात: सोना, मूंगा, काँच, धातुएँ
एरिथ्रियन सागर का पेरिप्लस (ई. 1वीं शताब्दी) में भारत-रोम व्यापार का वर्णन है।

मुद्राएँ और अर्थव्यवस्था:छापांकित सिक्के (Punch-marked coins, ई.पू. 6वीं शताब्दी) सबसे प्राचीन हैं।
इंडो-ग्रीक, कुषाण और गुप्त सिक्कों पर शासकों के चित्र मिलते हैं।
गुप्त स्वर्ण मुद्राएँ समृद्धि का प्रतीक हैं।
– छठी शताब्दी के बाद स्वर्ण मुद्राएँ कम मिलीं — कुछ इसे आर्थिक मंदी, तो कुछ मुद्रा परिसंचरण का परिणाम मानते हैं।

7. अभिलेखों का पाठ और व्याख्या

  • ब्राह्मी लिपि को जेम्स प्रिन्सेप (1838) ने पढ़ा।
  • खरोष्ठी लिपि का रहस्य द्विभाषी सिक्कों से सुलझा।
  • देवानंप्रिय पियदस्सी की उपाधि से अशोक की पहचान हुई।
  • अभिलेखविद कमजोर या अधूरे अभिलेखों का अर्थ संदर्भ के आधार पर निकालते हैं।

8. अभिलेखों की सीमाएँ

  • कई अभिलेख क्षतिग्रस्त या पक्षपाती हैं।
  • ये अधिकतर राजाओं और अभिजात वर्ग पर केंद्रित हैं; सामान्य जनता का जीवन लगभग अनुपस्थित है।
  • इसलिए इतिहासकार अभिलेखों को अन्य साहित्यिक और पुरातात्त्विक स्रोतों से मिलाकर देखते हैं।

कालक्रम (Timeline)

काल

प्रमुख घटनाएँ

ई.पू. 600–500

महाजनपदों का उदय, लौह उपयोग, सिक्के

ई.पू. 321

चंद्रगुप्त मौर्य का साम्राज्य स्थापना

ई.पू. 272–231

अशोक का शासनकाल

ई.पू. 200 – ई. 200

सातवाहन, शक, इंडो-ग्रीक; रोम के साथ व्यापार

ई. 320–415

गुप्त शासन (समुद्रगुप्त, चंद्रगुप्त II)

ई. 600–647

हर्षवर्धन; चीनी यात्री ह्वेनसांग का भारत आगमन

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • प्रारंभिक भारतीय राज्य जनजातीय समाजों से विकसित होकर साम्राज्य बने।
  • कृषि, व्यापार और मुद्रा अर्थव्यवस्था के मुख्य आधार थे।
  • धर्म और राजसत्ता एक-दूसरे से गहराई से जुड़े थे।
  • अभिलेख मूल्यवान स्रोत हैं, परंतु ये सीमित और अपूर्ण जानकारी देते हैं।